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Friday, 3 July 2009

मिलने की प्यास रहने दे

  • ये जो गम हैं मेरे, मेरे ही पास रहने दे |
  • जिन्दगी में बाकी ये , जीने की आस रहने दे ||
  • वो मिले या न मिले , उल्फत की शमा जलती रहे |
  • न रहे साथ भले , यादें ही पास रहने दे ||
  • कतरा कतरा शराब में जिन्दगी शामिल है |
  • मय मयस्सर नहीं , महकती हुई सांस रहने दे ||
  • घूँट दो घूँट में साँसे तो महक जाती हैं |
  • जो नशे का है सबब साकी को पास रहने दे ||
  • स्याह जुल्फों के किनारे से टपकता पानी |
  • बूँद मोती सी ये अश्कों के साथ रहने दे ||
  • क्या है रुखसत का सबब कौन पूछे ,जाने |
  • वक़्त आने का कहो ,मिलने की प्यास रहने दे ||
  • ये जुदाई तेरी बर्दाश्त के काबिल न सही |
  • मेरी चाहत है तुझे , इतना ही भरम रहने दे ||
= प्रदीप मानोरिया
09425132060

Friday, 26 June 2009

मोहब्बत - रूहानी ज़ज्बा

  • गुलशन में र वानी है , और रुत भी सुहानी है |
  • नहीं ज़ज्बा -ए-इश्क अगर ,फिर कैसी जवानी है ||
  • नहीं चैन कहीं मिलता , आँखे भी उनींदी हैं |
  • नज़रों में बसी सूरत ,ये इश्क निशानी है ||
  • आह्ट हो जरा कोई , आमद सी लगे उनकी |
  • नगमा ये मोहब्बत का, उल्फत की कहानी है ||
  • इज़हार मोहब्बत का , लफ्जों से लगे मुश्किल |
  • आँखों से ही कह देना , जो बात बतानी है ||
  • मिलना ही इश्क नहीं , उल्फत हो बिछड के भी |
  • हालात हों कोई भी , तेरी याद तो आनी है ||
  • भीगी सी हंसी जुल्फें , लहरा के चले जाना |
  • इनका ही सहारा है , खुसबू ही बसानी है ||
  • शम्मा ये मोहब्बत की , जो हमने जलाई है |
  • ये इश्क रहे ज़िंदा , ज़ज्बा ये रुहानी है ||
  • =प्रदीप मनोरिया
  • २६-०६-२००९
  • 09425132060

Wednesday, 7 January 2009

मौसम

मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
आयेंगे वो जो पास, मेरे इंतज़ार है |
वो दूर नहीं पास मेरे जान लीजिये |
है चश्म में रूख वो हसीं मेरे आज है |
मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
जुल्फों के पेंचों खम है भला स्याह क्यूं बडे |
दिन में हुई है शाम यहॉं गुल की बहार है |
मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
दिल की करें क्या बात भला इश्क के सिवा |
तेरा ही है वज़ूद यहॉं उसका खुमार है |
मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
तन्हाइयों में याद तेरी क्यों इतना सताती |
आ जाओ अब ना देर करो दिल बेकरार है |
मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
आयेंगे वो जो पास मेरे इंतज़ार है |
प्रदीप मानोरिया 
09425132060

Saturday, 22 November 2008

ज्योति = Pradeep Manoria

एक दिया जीवन का ज्योतिर्मय /
पलते पढते बढते जलता रहा / 
तीन दशक से कुछ ज्यादा / 
जीवन पथ पर हुआ अनुबन्धित विवाह संस्था में /
दो नन्ही ज्योति और हुई प्रस्फ़ुटित /
चलता रहा जीवन घडी के पेन्डुलम के साथ /
परिजन पुरजन का प्रेम ले आया पीहर तक /
मेल, मिलाप ,प्रेम ,ताने ,मिलने के बहाने /
अचानक फ़डफ़डाई और ज्योति बुझ गई /
देखते रहे वो ही परिजन दिये की ज्योति का बुझ जाना /
दो नन्ही ज्योति इस ख्याल से गुम /
मुख्य ज्योति के विलय से ऑंखे नम /
चेतनज्योति गई फ़िर किसी दिये में / 
उसी धारा में नये दिये की ओर /
दिखता नहीं संसार का कोई छोर / 
वह ज्योति जाते हुये छोड गई इक सवाल /
ढूंढना होगा हमॆं हल , क्या है संसार का सार ?
जाननी होगी हमें संसार की वास्तविकता /
क्या है हमारा स्वरूप कौन हैं हम ?
कब रूकेगा ये सिलसिला ?
चेतन अविनश्वर तत्व 
क्यों इस नश्वर देह की गुलामी में फ़ंसे है ?
प्रदीप मानोरिया 09425132060

Thursday, 30 October 2008

बुजुर्ग छांव

  • अपनो के विछोह से /
  • बंधे जिनके मोह से / 
  • उनके अवसान से /
  • जीव के प्रयाण से /
  • दुख की गहराई है / 
  • याद बहुत आई है / 
  • जितना मैं भुलाता हूँ /
  • भूल नहीं पाता हूँ / 
  • मुझ पे उनका साया था /
  • हाथों से मुझे खिलाया था / 
  • धूप में कुम्हलाता हूँ /
  •  सोच नहीं पाता हूँ /
  • कैसे अब जी पाऊँगा /
  • नहीं भुला पाऊँगा / 
  • नहीं भुला पाऊँगा, नहीं भुला / पाऊँगा 
Pradeep Manoria 
094-251-32060

Saturday, 11 October 2008

दिल की बीमारी

  • ये जो दिल की बीमारी है
  • किसी को नशा किसी को खुमारी है
  • तो किसी को बन गयी लाचारी है
  • जवानी में जब ये लगता है रोग
  • सुहाती तन्हाई काटते हैं लोग
  • उड़ जाती है भूख और प्यास
  • ऊपर से खुश अन्दर से उदास
  • नींद है गायब ख्वावों में खोया
  • जागते जागते ही लगता है सोया
  • लक्षण है रोग के अत्यन्त गंभीर
  • किंतु नहीं कोई चिकित्सक वीर
  • जो रोग से मुक्ति दिलाये
  • थोड़ी राहत का घूँट पिलाए
  • जवानी के बाद जो हो गए बीत जवान
  • उन्हें बूढा नहीं कहना ही है उनका सम्मान
  • इस बीमारी से बीत जवान हैरान
  • चलने में कभी चढ़ने में परेशान
  • बाहर है साँसों का नियंत्रण
  • नाकाम है दावतों के निमंत्रण
  • बरकरार है भूख और प्यास
  • मिलती है रूखी रोटी सब्जी और घास
  • हलुआ रवडी मिठाई के आते हैं ख्वाव
  • पुराने स्वाद को ही कर लेते हैं याद
  • बेड रेस्ट करो डाक्टर की सलाह
  • दिल की बेजारी नहीं कोई उपाय
  • कमरे में मौजूद एक अदद बीबी
  • सामने कोलाहल परोसती टी वी
  • जवानी में थी फूलों की डाली हीरे की कनी
  • बाजू में बैठी अब लगती है नागफनी
  • वास्तव में
  • राहे इश्क आसान है मुश्किल है डाक्टर की गली
  • दिल की बीमारी तो जवानी वाली ही भली
रचना प्रदीप मनोरिया

Wednesday, 27 August 2008

ज़ज्बात

खामोश तन्हा रात में सदा किस की रही होगी , ये हवा की आवारगी की दस्तक रही होगी / वक्‍त था मौका भी था फ़िर भी बयाँ न कर सके । इजहारे इश्क में शायद कुछ हया रही होगी / जामो मीना मय सभी लेकिन नहीं शुरूर था , इनायत-ऐ-साकी में आज कुछ कमी रही होगी / जीने की आरजू न रही इंतजार अब मौत का , उनकी दुआ में आज कुछ माकूलियत नहीं होगी / राज बे-परदा हुये राजदारी अब नहीं / अब निगाहों की शरम भी बाकी नहीं होगी / इशक की शै है कठिन कहकर दिखो हैरान तुम , खुद से तुमने कभी आशिकी की नहीं होगी / Pradeep Manoria