Wednesday, 4 March, 2009

फागुन की बहार - Pradeep Manoria

फागुन आयो फागुन आयो फागुन आयो रे |
बरसे रंग अबीर गुलाल गगन में फागुन आयो रे ||
गोपी नृत्य दृश्य कटि दौलन संग गिरधारी रे |
प्रेम नयन के तीर हैं तीखे, कर पिचकारी रे ||
बरसे रंग अबीर गुलाल गगन में फागुन आयो रे 
फागुन आयो फागुन आयो ...........
जाता जाड़ा ग्रीष्म की आमद लागे प्यारी रे |
धुप सुनहरी स्पर्श सुखद जब भीगे सारी रे ||
बरसे रंग अबीर गुलाल गगन में फागुन आयो रे 
फागुन आयो फागुन आयो ...........
टेसू ने वन उपवन पूरे  छठा गुलाबी रे |
मौसम का है नशा निराला , नयन शराबी रे ||
बरसे रंग अबीर गुलाल गगन में फागुन आयो रे 
फागुन आयो फागुन आयो ...........
चूनर भीगी अंगिया भीगी , कांच हुयी अब सारी रे |
कृष्ण कुंवर पीताम्बर छीना , राधा मतवारी रे  ||
बरसे रंग अबीर गुलाल गगन में फागुन आयो रे 
फागुन आयो फागुन आयो ...........
वंशी ले नटवर जा बैठे तान सुहानी रे |
झूमें गोपिन संग राधा के होकर दीवानी रे ||
बरसे रंग अबीर गुलाल गगन में फागुन आयो रे 
फागुन आयो फागुन आयो ...........
सुख स्पर्शन रंग माध्यम होली आई रे |
झूमें नाचें पकड़ लें बैंयां कुंवर कन्हाई रे |
बरसे रंग अबीर गुलाल गगन में फागुन आयो रे 
फागुन आयो फागुन आयो ........
= Pradeep Manoria 
09425132060