Thursday 30 October 2008

बुजुर्ग छांव

  • अपनो के विछोह से /
  • बंधे जिनके मोह से / 
  • उनके अवसान से /
  • जीव के प्रयाण से /
  • दुख की गहराई है / 
  • याद बहुत आई है / 
  • जितना मैं भुलाता हूँ /
  • भूल नहीं पाता हूँ / 
  • मुझ पे उनका साया था /
  • हाथों से मुझे खिलाया था / 
  • धूप में कुम्हलाता हूँ /
  •  सोच नहीं पाता हूँ /
  • कैसे अब जी पाऊँगा /
  • नहीं भुला पाऊँगा / 
  • नहीं भुला पाऊँगा, नहीं भुला / पाऊँगा 
Pradeep Manoria 
094-251-32060

22 comments:

rajesh said...

वह गुरु जी दादा के प्रति बहुत अच्छा लिखा है आपने

subhash said...

वह प्रदीप जी बहुत गंभीर भावः

kar lo duniya muththee me said...

बहुत बढ़िया आंतरिक भावनाएं परिलक्षित होती हैं
आपका स्वागत है मेर ब्लॉग पर

rahul said...

very nice
keep writing sir

Anonymous said...

आपकी इस रचना से आपके और आपके परिवारर की सम्पूर्ण छवि परिलक्षित हो रही है .. ...
मेहुल गाँधी

seema gupta said...

दुख की गहराई है /
याद बहुत आई है /
जितना मैं भुलाता हूँ /
भूल नहीं पाता हूँ /
" sach mey dukhee dil ke pukar hai...smvaidnsheel.."

Regards

Anil Pusadkar said...

प्रदीप जी बुजूर्गों की छावं ही संयुक्त परिवारों को बचा कर रखे हुए है। अच्छा लिखा आपने।दीवाली की शुभकामनाएँ ।

श्रीकांत पाराशर said...

Bahut achha likha hai aapne. bujurgon ki chhanv ka jo mahtav nahin samajh rahe hain ve bahut dukh paa rahe hain. aaj ekaki parivaron ki kya halat hai, kisi se chhupi nahi hai. bujurgon ki chhanv men jeevan kaise aage badhta chala jata hai pata bhi nahin chalta.

डॉ .अनुराग said...

आपका स्नेह ओर आदर दीखता है इस रचना में

common man said...

achche dhang se smaran kiya hai

manvinder bhimber said...

वह प्रदीप जी बहुत गंभीर भावः

मुकेश कुमार तिवारी said...

भैया जी,

बहुत अच्छे, अब तो आपको मोबाईलिया है. आगे भी संवाद जारी रहेगा. मेरा नया पोष्ट " विस्मृतियाँ " पढियेगा. आपकी टीका का इंतजार रहेगा.

मुकेश कुमार तिवारी

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बहुत सुंदर रचना, प्रभावी और गंभीर भाव!

निरन्तर - महेंद्र मिश्रा said...

अच्छा लिखा है,प्रभावी और गंभीर.

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुन्दर रचना, आप की रचना पढ कर मेरी आखॊ मे मेरा बचपन झुल गया जब मै अपने पिता जी की गोद मै बेठाता था, तो कुछ ऎसा ही महसुस करता था

dr. ashok priyaranjan said...

बहुत अच्छा िलखा है आपने । भाव की दृिष्ट से किवता बडी प्रभावशाली है ।ं

http://www.ashokvichar.blogspot.com

pintu said...

is rachna me aapka sneh saaf jhalakta hai! bahut sundar

DHAROHAR said...

भावपूर्ण पंक्तियाँ.

अमिताभ भूषण "अनहद" said...

नहीं भुला पाऊँगा ,बहुत खूब भाई साहब ,आत्मीय है आप की रचना

दिगम्बर नासवा said...

दिल को छु लेने वाली रचना
बहुत अच्छे

रचना गौड़ ’भारती’ said...

रचना ऐसी ही होनी चाहिए जो दिल को छू जाए ।
बधाई ।

ashok khatri said...

bhai pradeep ji aapne mere dil ko chhoo lene wali bat likhi hey kaisey aabhar vyakt karoo. bada marmik likha hey . dhanyavad