- गुलशन में र वानी है , और रुत भी सुहानी है |
- नहीं ज़ज्बा -ए-इश्क अगर ,फिर कैसी जवानी है ||
- नहीं चैन कहीं मिलता , आँखे भी उनींदी हैं |
- नज़रों में बसी सूरत ,ये इश्क निशानी है ||
- आह्ट हो जरा कोई , आमद सी लगे उनकी |
- नगमा ये मोहब्बत का, उल्फत की कहानी है ||
- इज़हार मोहब्बत का , लफ्जों से लगे मुश्किल |
- आँखों से ही कह देना , जो बात बतानी है ||
- मिलना ही इश्क नहीं , उल्फत हो बिछड के भी |
- हालात हों कोई भी , तेरी याद तो आनी है ||
- भीगी सी हंसी जुल्फें , लहरा के चले जाना |
- इनका ही सहारा है , खुसबू ही बसानी है ||
- शम्मा ये मोहब्बत की , जो हमने जलाई है |
- ये इश्क रहे ज़िंदा , ज़ज्बा ये रुहानी है ||
- =प्रदीप मनोरिया
- २६-०६-२००९
- 09425132060