Thursday, 22 January, 2009

आज की फैशन

  • फैशन की दुनिया में जबरदस्त कमाल है |
  • अल्पता और लघुता से आया हुआ भूचाल है |
  • पूर्व के आविष्कारों में स्कर्ट की लंबाई घटती गई |
  • अब स्कर्ट ऊपर से टॉप नीचे से घट जाना है फैशन नई |
  • low waist स्कर्ट या जीन्स show waist टॉप का नया फैशन है |
  • उसकी मोबाइल से फोटोग्राफी लडकों का पेशन है |
  • ऐसे नये फैशन से सुसज्जित कन्यायें |
  • जब सायकिल रिक्शा पर बैठ कर जायें |
  • पीछे चलने वाली मोटर साईकिल की गति मंद और ड्राइवर की ऑंखे फैल जाती हैं |
  • इससे होती हैं सडक दुर्घटनायें और इसमें पेट्रोल की बर्बादी है |
  • इस नई low waist और show waist फैशन से देश का नुकसान है |
  • कपडों की मितव्वियता और पेट्रोल के अपव्यय से देश परेशान है |
प्रदीप मानोरिया 09425132060

Friday, 16 January, 2009

जल पुनर्भरण आज की आवश्यक्ता - - WATER HARVESTING

  • सूखता जाता हुआ जल /
  • कुछ तो होगा इसका भी हल /
  • क्या ये प्रश्न करता है उद्वेलित /
  • इसे हल करने कभी हुए प्रेरित /
  • एकांगी रूप से प्रवृत्त व्यवहार में ही लीन हैं /
  • मिलता जहॉं से अरे मात्र लेने में तल्लीन हैं /
  • नीर के उपयोग के संग दुरूपयोग पर भी हैं डटे /
  • धीरे धीरे आज देखो नीर स्त्रोत भी हैं घटे /
  • क्यों नहीं अपनाते हम द्विमार्गी व्यवहार को /
  • जब लेने में हैं जो तत्पर फिर देने भी तैयार हों /
  • उपयोग के बाद व्यर्थ नाली में बहाना पानी को /
  • इंगित करता आगामी परेशानी और नादानी को /
  • जब धरा के स्त्रोत जल से नीर हम लेते रहे /
  • करें मेघ जल वापिस धरा को व्यर्थ अब वह बहे /
  • मेघ जल अभिषेक करना है धरा का अब यहॉं /
  • अन्यथा भावि समय में जल मिलेगा फिर कहॉं /
  • संग्रहित कर नीर बरखा निकट ही अर्पण करें /
  • घटते स्तर नीर का अब पुनि पुनि अरे वर्धन करें /
  • खर्च जीवन में अनेकों व्यर्थ भी धन जाय है /
  • व्यय करें कुछ धन भी इसमें ये धरा का न्याय है /
THOUGHTS COMPILED BY PRADEEP MANORIA

Saturday, 10 January, 2009

बूढी आशा

आशाओं से भरी निगाहें , मन कितना मजबूर है |
तन जर्जर सामर्थ्य नहीं है , दुःख ही दुःख का पूर है ||
सर्द रात तन रहे ठिठुरता , यह दरिद्र संजोग है |
हाथ में चिंदी असमंजस है , क्या इसका उपयोग है ||
चेहरे पर झुर्री का जाला , निर्धनता का नूर है  .......
आशाओं से भरी निगाहें , मन कितना मजबूर है |
तीन पहर तो बीत चुके हैं ,आई जीवन की सांझ है |
इनके लिए तो सुख की जननी , रही सदा ही बाँझ है ||
सुर सरगम मर्सिया हैं गाते , सुख खट्टे अंगूर है ........
आशाओं से भरी निगाहें , मन कितना मजबूर है |
शिशिर बसंत हेमंत शरद , ऋतू सब ही आनी जानी |
अर्ध वस्त्र और भोजन आधा, जीवन की है यही कहानी ||
फ़िर भी जीवन जीते जाते , ईर्ष्या से रह दूर है ...........
आशाओं से भरी निगाहें , मन कितना मजबूर है |
दूर ये नज़रें   देख रही हैं, सुख की कुछ परछाईं हो |
भाग्य  विधाता  को भी शायद याद हमारी आई हो ||
दुःख भोगें  और सपने  देखें इसमे नही कुसूर  है ....
आशाओं से भरी निगाहें , मन कितना मजबूर है |
तन जर्जर सामर्थ्य नहीं है , दुःख ही दुःख का पूर है ||
प्रदीप मानोरिया   अशोकनगर (MP) संपर्क 094 251 32060 
The picture by coutsey of shunya.net  

Wednesday, 7 January, 2009

मौसम

मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
आयेंगे वो जो पास, मेरे इंतज़ार है |
वो दूर नहीं पास मेरे जान लीजिये |
है चश्म में रूख वो हसीं मेरे आज है |
मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
जुल्फों के पेंचों खम है भला स्याह क्यूं बडे |
दिन में हुई है शाम यहॉं गुल की बहार है |
मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
दिल की करें क्या बात भला इश्क के सिवा |
तेरा ही है वज़ूद यहॉं उसका खुमार है |
मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
तन्हाइयों में याद तेरी क्यों इतना सताती |
आ जाओ अब ना देर करो दिल बेकरार है |
मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
आयेंगे वो जो पास मेरे इंतज़ार है |
प्रदीप मानोरिया 
09425132060

Monday, 5 January, 2009

टी वी सीरियल्स एकता स्टाइल

पारिवारिक पृष्ठ भूमि की कहानियों पर आधारित / 
आजकल चल रहे टी वी के धारावाहिक /
समाज में खूब छा रहे हैं / 
शायद सभी को भा रहे हैं / 
भारतीय संस्कृति की संकेत मात्र साडियॉं / 
ब्लाउज की आवश्यकता को नकारती टीवी की नारियॉं /
वक्रता के भाव चेहरे पर सजाये / 
अपने शारीरिक सौष्ठव को दर्शायें / 
कुटिलतायें और षडयंत्र /
इनकी सफलता का मंत्र / 
इतना ही नहीं काफी आगे और भी देखिये / 
नयनों के साथ कानों को भी सेंकिये / 
सामान्य से माहौल में साधारण से संवाद / 
पार्श्व में चलती हुई कानफोडू आवाज / 
तेज नगाडे और तलवार के खींचे जाने के स्वर / 
प्रतीत होता मानो आया युध्द का अवसर / 
चाय पीते हुये या कुछ खाते हुये टीवी देखो / 
कर्णफाड संगीत से खिसियाकर कप ही फैंको /
टीवी के किसी पात्र को यदि हार्ट अटैक आया है / 
पार्श्व में नगाडा और झिंगझांग बजाया है / 
ऐसा लगता है हार्ट अटैक नहीं आया है / 
मानो यमराज सेना लेकर सीधा ही चला आया है / 
आपके घर में है यदि अच्छी और बडी सी टीवी / 
और साथ में है सीरियल पसंद करने वाली बीबी / 
बेहतर कि कान में लगाने को रुई ले आयें /
दिल मन और चित्त में शांति पायें / 
साथ ही >>> सीरियल निर्माताओं से गुजारिश है और इतना ही चाहें /
दिखाने में आप स्वतंत्र हैं कितना भी दिखायें / 
किन्तु पार्श्व संगीत में थोडी कमी अवश्य लायें / 
==प्रदीप मानोरिया
09425132060