Sunday, 20 June, 2010

दिल गीत और सुर

  • अफ़साने कुछ अनजाने से गीत पुराने लाया हूँ |
  • तेरी महफ़िल में बातों से लफ़्ज़ चुराने आया हूँ ||
  • लव खामोश और बन्द निगाहें स्याह अंधेरा छाया है |
  • तेरी सांसो की आवाज़ें सुर मैं मिलाने आया हूँ ||
  • खाली सागर फ़ैले पैमाने महफ़िल उजडी उजडी है |
  • बेसुध रिंदो के आलम में दो घूँट मैं पाने आया हूँ ||
  • रुत बरखा की मेघ दिखें न दिल धरती सा तपता है |
  • आँसू की दो बूँद बहा कर तपन मिटाने आया हूँ ||
  • दिल की चाहत दिल में रखकर वक्त बहुत अब बीत गया |
  • जीवन की संध्या में अब मैं याद दिलाने आया हूँ ||
=Pradeep Manoria 9425132060

Tuesday, 15 June, 2010

मौन की पौन

  • आज अर्जुन दिख रहा क्यों कौरवों के वेश में ।
  • क्यों दिशा से रहित वायु बह रही इस देश में ॥
  • श्मसान सा भोपाल को जिनने बनाया था कभी ।
  • अब भी उनको पालते अर्जुन हमारे देश में ॥
  • कौन है जो डस गया और सपेरा कौन है।
  • हर कोई सच जानता अब हमारे देश में ॥
  • घट गया वह बुरा था सच उजागर आज है।
  • मौन कठपुतला रहा फ़िर भी हमारे देश में ॥
  • मौन वह है हाथ जिससे चल रही सब डोर है।
  • और बेटा मौन है नायक बना जो देश में ॥
  • लाशें कुचल कर कैसे भागा वो फ़िरंगी बेरहम ।
  • इसका उत्तर मांगती जनता हमारे देश में ॥ =प्रदीप मानोरिया