Showing posts with label india. Show all posts
Showing posts with label india. Show all posts

Thursday, 13 August 2009

swantrata diwas =pradeep manoria

गली गली में बजते देखे आज़ादी के गीत रे
जगह जगह झंडे फहराते यही पर्व की रीत रे
सभी मनाते पर्व देश का आज़ादी की वर्षगांठ है
वक्त है बीता धीरे धीरे साल द्वय और साठ है
बहे पवन परचम फहराता याद जिलाता जीत रे
गली गली में बजते देखे आज़ादी के गीत रे
जगह जगह झंडे फहराते यही पर्व की रीत रे
जनता सोचे किंतु आज भी क्या वाकई आजाद हैं
भूले मानस को दिलवाते नेता इसकी याद हैं
मंहगाई की मारी जनता भूल गई ये जीत रे
गली गली में बजते देखे आज़ादी के गीत रे
जगह जगह झंडे फहराते यही पर्व की रीत रे
हमने पाई थी आज़ादी लौट गए अँगरेज़ हैं
किंतु पीडा बंटवारे की दिल में अब भी तेज़ है
भाई हमारा हुआ पड़ोसी भूले सारी प्रीत रे
गली गली में बजते देखे आज़ादी के गीत रे
जगह जगह झंडे फहराते यही पर्व की रीत रे
===प्रदीप मानोरिया
०९४२५१३२०६०

Tuesday, 30 December 2008

स्वागत -२००९ - प्रदीप मानोरिया

 
नव  वर्ष  में  वंदन नया , 
उल्लास  नव आशा  नई  |
हो भोर नव आभा  नई, 
रवि  तेज  नव ऊर्जा  नई |
विश्वास  नव उत्साह  नव,
नव चेतना उमंग नई |
विस्मृत जो बीती  बात है ,
संकल्प  नव परनती  नई |
है भावना  परिद्रश्य  बदले , 
अनुभूति नव हो सुखमई |
किंतु हालात  क्या  होते हैं :---
सरकार  नव आकार  नव ,
नेता  नया बातें वही |
दुश्मनी की परम्परा वह , 
जो पडौसी भाई वही |
खेल चूहा बिल्ली का ,
चूहा वही बिल्ली वही |
हमले वह आतंक वो ही,
जेहाद औ मज़हब वही |
मुखिया वही करता वही ,
कहता मैं मुखिया नहीं |
कुछ कर सके सरकार मेरी, 
दिखता उसे कुछ हल नहीं |
अथवा सब कुछ जानते , 
किंतु अरे हिम्मत नहीं |
स्वच्छता का  भरते दम , 
जो स्वच्छ साँसे भी नहीं |
देश की कीमत  नहीं है , 
घूस  औ रिश्वत वही |
है समय का बीतना ही, 
समय की नियति यही |
है नियत सब कुछ जगत में , 
जो हो रहा सब है सही |
==प्रदीप मानोरिया 
094 251 32060 
चूहा - बिल्ली का खेल = भारत पकिस्तान के परस्पर हालात

Monday, 8 December 2008

दंगल के बाद --- प्रदीप मानोरिया

कोई खुश तो कोई खीजा और कोई खामोश है |
मतगणना के परिणामों  से कहीं रोष या जोश है ||
शिव शीला और रमन सिंह ने सत्ता पाई दोबारा है |
जीत गए नेता खुश होते , वोटर फ़िर भी हारा है  ||
राजस्थान में मौजूदा पर नहीं किया विश्वास है  |
वसुंधरा मायूस हुईं क्या,क्या टूटी अब आस है ||
वादों का धर भार कंधे पर पहुंचे सत्ता के पास हैं |
वे वादों को भले ही भूलें , वोटर रखता आस है ||
आस धरे वोटर बैठा है , होता सदा निराश है |
नेता को सता सुख प्यारा, नोट अरु वोट चटास है ||
बड़े बड़े दिग्गज भी  हारे , जो आशा पर जीते हैं |
आज हुआ माहौल जो ऐसा, भरी दुपहरी पीते हैं || 
नये नए चेहरे भी जीते ,दंगल इसी चुनावी में |
कुछ की नैया पार लगी है, चलती लहर प्रभावी में ||
नए विधायक खुशी  असीमित, दिखता भारी जोश है |
मतगणना के परिणामों ने फैलाया आगोश है  || 
कोई खुश तो कोई खीजा और कोई खामोश है |
मतगणना के परिणामों  से कहीं रोष या जोश है ||
=प्रदीप मानोरिया  09425132060 

Saturday, 15 November 2008

भारतीय लोकतंत्र - Pradeep Manoria

राजतंत्र  को हटा प्रजा का लोकतंत्र ले आए | 
प्रगति स्वप्न को भूल ,मंत्र बापू नेहरू के भुलाए ||
समय चक्र के चलते साल हैं साथ बिताये |
किंतु नहीं आकलन इसका पहुँच कहाँ हम पाये ||
भ्रष्टाचार का भूत बहुत नेताओं पर मंडराए |
बहुत हैं अफसर बाबू चपरासी वे भी नहीं बच पाये ||
नेता सत्ता का ऐसा प्रेमी दिन भर स्वप्न सजाये |
करे नोट वोटों की तिजारत ,देश भाड़ में जाए ||
अफसर देश चलाते हैं पर नोट देख ललचायें |
निष्ठा खूंटी पर टांग अरे ये किंचित न शर्मायें ||
लोकतंत्र का चढ़ा मुखौटा लालफीत ही चलायें |
सेवा,पूजा,घूस-ओ-रिश्वत जनता रोज चढाये ||
सरकार हुयी स्वचालित हमारी चालक सोता जाए |
देश की जनता करे सवारी पल पल झटके खाए ||
प्रदीप मानोरिया 
संपर्क 094 25132060 

Wednesday, 12 November 2008

भ्रष्टाचार के अनेक रंग

एक उच्च पद पर आसीन शासकीय अधिकारी / 
मंह्गे मोबाइल लम्बी गाडी से लेस सूट धारी / 
जीवन में हैरान परेशान तनाव से ग्रस्त / 
भाग दौड और अनजाने भय से त्रस्त / 
दोस्त की सलाह पर तथाकथित  बाबा के पास धाये / 
चरणों में कर नमोस्तु अपनी व्यथा सुनाये / 
बाबा ने कहा एक काम कीजिये आप / 
सुरा सुन्दरी सहित छोड दीजिये पाप / 
अफ़सर ने कहा बाबा जरूर / 
मुझे आपका आदेश मंजूर / 
लेकिन एक चीज से बहुत घबराता हूं / 
आप कहें तो आपको बताता हूं / 
मैं ऐसे विभाग में हूं मेरी ऊपरी कमाई मजबूरी है / 
ना भी चाहूं तो भी ये जरूरी है / 
मैं इस पाप से बहुत घबराता हूं /
छोडना चाहता हूं नहीं छोड पाता हूं 
मै करना चाह्ता हूं प्रायश्चित / 
कोई उपाय बतायें उचित / 
बाबा ने कहा उपाय बहुत सहज और आसान है / 
बच्चा क्यों इतनी सी बात से परेशान है / 
परेशानी छोड और बिल्कुल नहीं घबराना / 
अपनी ऊपरी कमाई का चौथाई हिस्सा यहॉं भिजवाना / 
तेरे सारे पाप हो जायेंगे साफ़ / 
दान धर्म से हो जायेंगे माफ / 
 PRADEEP MANORIA
09425132060

Wednesday, 8 October 2008

शेयर बाज़ार

  • शेयर बाजारी कारोबारी टूट गयी सब आस
  • बनी चवन्नी जो था रुपया रोऊँ किसके पास
  • अरे बुश की बलिहारी है चोट ये बड़े करारी है
  • संभल न पाया गोता खाया महल बना जो ताश
  • बड़ों बड़ों के छक्के छूटे चेहरा हुआ उदास
  • अरे बुश की बलिहारी है चोट ये बड़े करारी है
  • तीव्र गति से मंद मति से चाहें करें विकास
  • ओंधें मुंह बाज़ार पडा है कारण क्या है ख़ास
  • अरे बुश की बलिहारी है चोट ये बड़े करारी है
  • मंदी हालत भाग्य को लानत हुया ये सत्यानाश
  • धंधा ये आराम का जंचता अन्य न आता रास
  • अरे बुश की बलिहारी है चोट ये बड़े करारी है
  • प्रदीप मानोरिया संपर्क ०९४२५१३२०६०

Sunday, 5 October 2008

नैनो की विदाई

  • अब छोड़ के यह सिंगूर . कि जाना मुझको है अब दूर
  • यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
  • छोड़ के ये बंगाली साया , इसको गुज्जू देश है भाया
  • पहुँच के भुज में बनेगी फ़िर ये सड़कों की जो हूर
  • यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
  • ममता की निर्ममता भारी , मिष्ट स्वाद को किया है खारी
  • रतन जी टाटा की मजबूरी ,जाना है अब दूर
  • यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
  • बेटी बंगाल की हुयी पराई , मोदी के घर हुयी सगाई
  • कच्छ देश में उसी वेश में, चमकेगा फ़िर नूर
  • यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
  • सपना टाटा का बड़ा ही जूना, टूटेगा अब यह कबहू ना
  • कारण टाटा उद्योगों में, रहे सदा ही शूर
  • यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
रचना प्रदीप मानोरिया ०४-१०-२००८ संपर्क ०९४२५१३२०६०

Friday, 3 October 2008

१२३ परमाणु करार

  • आज हमारे पडौसी श्री राम अवतार
  • भोर ही पधारे लेकर गरमागरम अखवार
  • बोले भाई साहेब बहुत बहुत बधाई
  • कहकर जलेबी की पुडिया आगे बढाई
  • मैंने प्रश्नवाचक भंगिमा बनाई
  • तब उन्होंने ख़बर सुनाई
  • जिसके लिए प्रधानमंत्री जी थे बेकरार
  • आख़िर हो ही गया वो परमाणु करार
  • राम अवतार ने अपना मुंह फ़िर खोला
  • और बड़े विश्वास से बोला
  • कि देश की जनता अब लाभ उठाएगी
  • बिजली की कटौती कम हो जायेगी
  • पूरी बिजली और पानी की समस्या सुलझेगी
  • परेशान जनता भी अब चैन से रह लेगी
  • मंहगाई जो छु रही थी आसमान
  • उस पर भी कसेगी अब कमान
  • मैंने तब राम अवतार के सपनो को विराम दिया
  • जैसे तैसे मिथ्या आशावादी रामअवतार को चुप किया
  • मैंने कहा अरे राम अवतार ज़रा मेरी भी सुनो
  • सुबह सुबह से ही शेखचिल्ली मत बनो
  • जो बिजली पानी की समस्या और मंहगाई का बुखार है
  • उसका कारण अराजकता और भ्रष्टाचार है
  • यह परमाणु करार तुम्हारे काम का नहीं है
  • इससे हम तुम को कोई आराम नहीं है
  • यह तो मुद्दे की जड़ से उत्पन्न दंभ का परिणाम है
  • हम तो उतने ही मजबूर है इससे हमारा क्या काम है रचना प्रदीप मानोरिया