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Tuesday, 25 November 2008

चुनावी चौपाइयां

दंगल की घड़ी अन्तिम  आई , नेताओं ने रार मचाई |
मतदाता ने मौन है धारा, नेता चाहे वोट तुम्हारा  |
नागनाथ कोई साँप नाथ है , कोई फूल तो कोई हाथ है |
बैठ हाथी पर कुछ धाये, कोई कहीं साइकिल ही चलाये |
दल दल से हैं दूर कुछ नेता , वे निर्दलीय कहाते नेता |
चिह्न नगाडा सूरज तारा , वे भी मांगे वोट तुम्हारा |
इक दूजे पर पंक उछालें , अपनी गलती स्वयं दबा ले |
वादे नित नए रोज सुनाएँ, अपनी ढपली राग बजाएं |
मतदाता राजा बन घूमे, प्रत्याशी क़दमों को चूमे |
है वो सिकंदर जो है जीता ,हारा हुआ गम अश्क है पीता |
जीते जो घर बजे नगाडा , कितु वोटर सदा ही हारा  |
प्रदीप मानोरिया 

Thursday, 16 October 2008

चुनावी दंगल - प्रदीप मानोरिया

  • रणभेरी की गूँज उठी अब निर्वाचन आयोग से
  • पाँच राज्य में मचेगा दंगल, जीतें भाग्य संयोग से
  • नेता व्यस्त अब हर स्तर के कोई न कोई काम से
  • जाग पड़े हैं उठ बैठे हैं , सोते थे आराम से
  • कोई मांगे कोई देता कोई टिकिट दिलाता है
  • सबको मिलता टिकिट कहाँ कोई कोई ही पाता है
  • जो न पाता टिकिट वही फ़िर जुड़ता सेबोटेज से
  • रणभेरी की गूँज उठी अब निर्वाचन आयोग से
  • पाँच राज्य में मचेगा दंगल, जीतें भाग्य संयोग से
  • झंडे डंडे चर्चा पर्चा मंच कहीं या माइक है
  • जुटे पड़े हैं सब ही देखो यद्यपि नहीं वे लायक है
  • घूमे घर घर दर दर प्रत्याशी याचें सबसे वोट है
  • नत मस्तक कर जोर भंगिमा मानो गर्दन में चोट है
  • झूठे आश्वासन लेकर घूमे . उपजे स्वारथ की कोख से
  • रणभेरी की गूँज उठी अब निर्वाचन आयोग से
  • पाँच राज्य में मचेगा दंगल, जीतें भाग्य संयोग से
  • लोक तंत्र को टांग खूंटी पर चलते चाल दुधारी हैं
  • साम दाम और दंड भेद , डंडे गुंडे तैयारी है
  • वोटर देखे टुकुर टुकुर सब , वो ही एक बेचारा है
  • विजय पराजय कोई की हो वोटर सदा ही हारा है
  • यह दंगल नेता को प्यारा, वोटर पीड़ित इस रोग से
  • रणभेरी की गूँज उठी अब निर्वाचन आयोग से
  • पाँच राज्य में मचेगा दंगल, जीतें भाग्य संयोग से
  • रचना == प्रदीप मानोरिया १७ अक्टूबर २००८

Tuesday, 7 October 2008

कांग्रेसी दोहे

  • पार्टी जो कांग्रेस है मैडम आलकमान | 
  • अबकी से तो कर दिया , जारी ये फरमान ||
  • नेताओं ने मिल किया, पार्टी बंटाढार | 
  • अत: टिकिट बांटे सभी योग्यता के अनुसार ||
  • किंतु मध्यप्रदेश में नेता सात प्रधान | 
  • स्वयं बैठ मिल कर लिया कोटे का निर्माण ||
  • उपकृत निज चमचे रहें अत: धरा ये स्वांग | 
  • मैडम के फरमान को दिया खूंटी पर टांग ||
  • डीएस जे एस एस पी धर अपने यह कोड |
  • कोटा से बांटे टिकिट यही गुणा और जोड़ ||
  • अर्जी टिकिटअर्थी बनी धर ऐसा आधार | 
  • चमचे किसके हो कहो किस प्रति वफ़ा दार ||
  • चाहे क्षेत्र में हो नहीं किंचित भी आधार | 
  • चमचागिरी का कोड बता पाओ टिकिट तुम यार ||
  • पार्टी का कुछ भी बने, लेने जाए तेल | 
  • कोटा पेटा भर चलो राजनीती का खेल ||  
  • रचना प्रदीप मानोरिया

Monday, 29 September 2008

मुख्यमंत्री जी की आशीर्वाद यात्रा (MP) -मेरी नज़र से

  • शुरू हुयी जबसे तथाकथित आशीर्वाद यात्रा
  • अचानक बढ़ गयी शहर में नेताओं की मात्रा
  • सर पर विधानसभा चुनाव लटक रहे हैं
  • हर तरह के नेता टिकिट के लिए भटक रहे हैं
  • योजनाओं का पुलिंदा मुख्यमंत्री जी के पास तैयार है
  • बस में घूम रहे हैं क्योंकि पुलिंदा ढोने को कार तो बेकार है
  • रोज हो रही हैं नई नई योजनाओं की घोषणा
  • रोज हो रही हैं बच्चों की मौत कारण है कुपोषणा
  • हर शहर का पेंटर व्यस्त हो गया है अनायास
  • क्योंकि रोज हो रहे है अनगिनत शिलान्यास
  • एक एक पेंटर मार्बल के पटिये खोद रहे हैं
  • ख़ुद नहीं पाये तो मुख्यमंत्री जी ऐसे ही ठोक रहे हैं
  • यह आशीर्वाद यात्रा नहीं मार्केटिंग का टूर है
  • इनका ग्राहक वोटर आज भी लाचार और मजबूर है
  • रचना प्रदीप मानोरिया