- रणभेरी की गूँज उठी अब निर्वाचन आयोग से
- पाँच राज्य में मचेगा दंगल, जीतें भाग्य संयोग से
- नेता व्यस्त अब हर स्तर के कोई न कोई काम से
- जाग पड़े हैं उठ बैठे हैं , सोते थे आराम से
- कोई मांगे कोई देता कोई टिकिट दिलाता है
- सबको मिलता टिकिट कहाँ कोई कोई ही पाता है
- जो न पाता टिकिट वही फ़िर जुड़ता सेबोटेज से
- रणभेरी की गूँज उठी अब निर्वाचन आयोग से
- पाँच राज्य में मचेगा दंगल, जीतें भाग्य संयोग से
- झंडे डंडे चर्चा पर्चा मंच कहीं या माइक है
- जुटे पड़े हैं सब ही देखो यद्यपि नहीं वे लायक है
- घूमे घर घर दर दर प्रत्याशी याचें सबसे वोट है
- नत मस्तक कर जोर भंगिमा मानो गर्दन में चोट है
- झूठे आश्वासन लेकर घूमे . उपजे स्वारथ की कोख से
- रणभेरी की गूँज उठी अब निर्वाचन आयोग से
- पाँच राज्य में मचेगा दंगल, जीतें भाग्य संयोग से
- लोक तंत्र को टांग खूंटी पर चलते चाल दुधारी हैं
- साम दाम और दंड भेद , डंडे गुंडे तैयारी है
- वोटर देखे टुकुर टुकुर सब , वो ही एक बेचारा है
- विजय पराजय कोई की हो वोटर सदा ही हारा है
- यह दंगल नेता को प्यारा, वोटर पीड़ित इस रोग से
- रणभेरी की गूँज उठी अब निर्वाचन आयोग से
- पाँच राज्य में मचेगा दंगल, जीतें भाग्य संयोग से
- रचना == प्रदीप मानोरिया १७ अक्टूबर २००८
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Thursday, 16 October 2008
चुनावी दंगल - प्रदीप मानोरिया
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