
प्यार उससे जिसको कभी देखा नहीं
तस्वीर नज़रों में रहे
जुबाँ बयाँ ना कर सके
दिल दास्ताँ कहता रहे
उनकी हर इक अदा है कातिल बड़ी ,
बन्दा यह मर मर के भी जिंदा रहे
नींद भी आती नहीं बंद आँखे या खुली
उनके ख्वावों में यह रात नागिन सी रहे
सुबह उठ कर ढूंढते हैं निशाँ ख्वावो के मगर
तनहा मैं तनहा है कमरा तनहा ही बिस्तर रहे
है तमन्ना दीदार की वह रुख हसीं मैं देख लूँ
उसने कहा मुश्किल , तमन्ना ख्वाव में ही बस रहे
प्यार उससे जिसको कभी देखा नहीं
तस्वीर नज़रों में रहे
जुबाँ बयाँ ना कर सके
दिल दास्ताँ कहता रहे
= Pradeep Manoria Cell No. 094-251-32060
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