Saturday 26 July 2008

CAREER COUNCILING

हमारे पडौसी मौजीलाल का परिवार भोला सहज और मिलनसार एक दिन अचानक हमारे घर पर आए थोड़े से चिंतित और थोड़े से घबराए बोले मोहल्ले के बच्चे कितने आगे आ गए कोई आई आई टी एम् बी ऐ या मेडीकल में प्रवेश पा गए मैं भी अपने बालक के लिए चिंतित और परेशान हूँ पढाई में है कमज़ोर अत: अधिक हैरान हूँ पढाई में कमज़ोर कमजोरी नहीं मजबूती है ऐसी प्रतिभाएं ही तो नए आयाम छूती हैं मेरी बात सुनकर चकरा गए मौजीलाल बोले आप समझे नहीं सवाल मैंने बात को आगे बढाया मौजीलाल को ठीक से समझाया ऐसी प्रतिभाओं के लिए राजनीती उपयुक्त है इसका कैरियर सदैव शिक्षा की अनिवार्यता से मुक्त है अपने बेटे को इसी क्षेत्र में आगे बढाइये थोडा सा त्याग है बाद में जीभर कर नोट कमाइए प्रशिक्षण दिलाइये झंडे डंडे नारे लगाने का दिग्गज नेताओं के चमचे और चापलूस बन जाने का थोड़े ही समय में फूटकर रकम कमाने लगेगा धीरे धीरे स्थानीय जन वर्ग में पैठ बनाने लगेगा मौका देखकर छोटा मोटा चुनाव लड़वाइये दो तीन बार हारने के बाद खर्चा करके जितवाइये चुनाव जीतकर इसका जादू छाने लगेगा आपका चिरंजीव अच्छा खासा कमाने लगेगा यदि बन गया सांसद या विधायक पूरे परिवार के लिए हो जायेगा सुखदायक सदन में वोट डालने और नही डालने की कीमत ले आयेगा एक ही झटके में मौजीलाल वह करोड़ों कमाएगा कैरियर बनाने को यह क्षेत्र सबसे सुंदर है थोड़ी सी सफलता के बाद तो रकम का समुन्दर है ===प्रदीप मानोरिया

1 comment:

SHAYAR KI SHAYARI said...

aapki kavitaon mein ek alag hi mithas hai,inko na sirf padhne mein maza aata hai balki inse sandesh bhi acche milte hai.yeh itni acchi hai ki kisi bhi mere jaise kavita ke premi ka waqt inhe
padhte hue kab nikal jaaye pata hi nahi lagta