Saturday 26 July 2008

बरसात

तपन जेठ की सहसा नभ में बदरा कारे घिर आए रिमझिम रिमझिम बरस बरस के गीत राग मल्हार सुनाये तन मन शीतल कर डाला है मौसम ने लेकर अंगडाई देकर दस्तक ठंडी बूंदों ने जेठ मास में तपन बुझाई गति वृद्धि वर्षा रिमझिम से अरे झमाझम बरस रही गली गली पानी में डूबी भर पानी से खूब बही अधनंगे बच्चे गलियों में आनंदित हो खेल रहे बना बना कागज़ की नावें तेज़ गति से बहती रहे बैठ गोख में गरम पकौडे और चाय का ले प्याला मज़ा फुहार का बैठे बैठे बातों का घेरा डाला तपन जेठ की सहसा नभ में बदरा कारे घिर आए रिमझिम रिमझिम बरस बरस के गीत राग मल्हार सुनाये रचना = प्रदीप मानोरिया संपर्क ०९४२५१३२०६०

2 comments:

kuchh hum hanse kuch tum...(manoj) said...

first i would like to thaks u for incouraging me in hindi wrinting.

amit said...

बहुत अच्छा वर्षा गीत गुनगुनाने का मन हो उठा