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Friday, 26 December 2008

धक्का-अष्टक = प्रदीप मानोरिया

धक्का की महिमा बड़ी , करना सोच विचार |
धक्के  से ही होत हैं,  काम अनेक हज़ार ||
धक्के से ही चल रही हिंद देश सरकार |
मेडम धक्का देत हैं , ड्राइवर है सरदार ||1||
धक्का मंदी का पायकर , औंधा शेयर बाज़ार |
अब तेज़ी का मुंह तके , धक्के का इंतज़ार ||2||
इस मंदी के धक्के से , बचा ना कच्चा तेल |
नित नित नीचे दाम हैं , यह धक्के का खेल ||3||
वोटों का धक्का पायकर, बने विधायक आज |
हर नेता यह चाहता , सबको धक्के की आस ||4||
धक्के से चालू करें , जूनी मोटर कार |
ड्राइवर बैठा सीट पर , मालिक धक्कादार ||5||
सुख स्पर्श की चाह में , दिन भर फिरें बाज़ार |
कोहनी धक्का मुक्की से , लहते सुक्ख अपार ||6||
नव दुल्हन है रूम में , दूल्हा खडा है द्वार |
भाभी धक्का देय तो , पहुंचे सुख संसार ||7||
वर्णन धक्का जो सभी , नहीं यहाँ उपयुक्त |
आप विचारें, जान लें , सोच आपकी मुक्त ||8||
= प्रदीप मानोरिया 
0-94-251-32060

Saturday, 20 December 2008

ताजे दोहे

 
दिल्ली :-
देत दुहाई जो रहे , मानव के अधिकार |
निरस्त पोटा कर दिया ,मनमोहन सरकार ||
नीर समान बहता रहा,निर्दोषों का खून  |
बस वोटों के लोभ में ,टांग दिया क़ानून ||
हमले आतंकी हुए ,बढ़ने लगा दबाब |
तब जाके जागे कहीं, टूटे लोभ के ख्वाव ||
नए नाम नई जिल्द में ,प्रस्तुत वही किताब |
पुन: वही क़ानून अब , वाह मनमोहन साब ||
राजस्थान :-
लोकतंत्र का हो रहा , कैसा ये उपहास |
अनपढ़ भी मंत्री बनी ,वाह कुर्सी की प्यास ||
पाकिस्तान :-
ये कसाब है पाक का , कहने लगे नवाज़ |
जो सबूत थे मांगते , उनकी यह आवाज़ ||
= प्रदीप मानोरिया 
09425132060

Friday, 24 October 2008

हैरान दोहे

  • वित्त मंत्री की सीख है , धरें निवेशक धीर |
  • डूबे नित्य बाज़ार है , कौन सुनाएँ पीर ||
  • -
  • मंदी की इस रेस में , डॉलर क्यों मज़बूत |
  • बात समझ से दूर है, कैसा मंदी का भूत ||
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  • स्वर्ण रजत सब खो रहे, नित्य चमक जो भाव |
  • कहाँ रुकेगा जाय कर , खोजो कछु उपाव ||
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  • गर्व सफलता भेजकर, चंदा पर जो यान |
  • विश्व बॉस चिंता करे ,आगे क्यों हिन्दुस्तान ||
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  • दिवाली इस बार की , ली घुंडी से हीन |
  • दिवाला इस पर्व पर , लक्षपति भये दीन ||
प्रदीप मानोरिया