Tuesday 2 September 2008

ज़िंदगी

सुधी पाठकों के ध्यानाकर्षण के लिए पुन: प्रस्तुत है
  • अफ़साना ज़िंदगी का कैसे तुम्हे सुनाये
  • सूखा है सबका गुलशन कैसे बहारें लायें
  • इस रंजोगम के बिन नहीं, दुनिया में है कोई
  • खुशियों के चंद लम्हे सौगात गम भुलाए
  • ज़िंदगी में गम ही सही इक पल का है फकत
  • वो पल है जाने वाला , इसका मज़ा उठाएं
  • उनको खुशी मिली है हकदार जो थे इसके
  • उनकी खुशी से हम क्यों गम अपने को बढायें
  • हो कितना भी कठिन अरे , जीवन का ये सफर
  • गिर गिर के फ़िर संभलना ,आगे ही बढ़ते जाएँ
  • अफ़साना ज़िंदगी का कैसे तुम्हे सुनाये
  • सूखा है सबका गुलशन कैसे बहारें लायें

== प्रदीप मानोरिया

10 comments:

शोभा said...

बहुत अच्छा लिखा है।

श्रीकांत पाराशर said...

pradeepji, bahut achhi rachna.

seema gupta said...

उनको खुशी मिली है हकदार जो थे इसके
उनकी खुशी से हम क्यों गम अपने को बढायें
"beautiful lines, liked it"

Regards

मधुकर राजपूत said...

हो कितना भी कठिन अरे , जीवन का ये सफर
गिर गिर के फ़िर संभलना ,आगे ही बढ़ते जाएँ
शिक्षाप्रद पंक्तियां, साहस की झलक है इनमें, ऊर्जा है। कुंठा से निकलता साहस का नया रास्ता। सुंदर।
एक बात और कहनी है मनोरिया जी, हम जरा इश्क के मामले में कमजोर हैं, कुछ खास लिखना नहीं जानते। इसलिए कभी-कभी आपके ब्लॉग से कुछ पंक्तियां अपनी प्रेमिका को भेज देते हैं, लेकिन अपने नाम से नहीं भेजते। इस अपराध के लिए क्षमा करें।

महेंद्र मिश्रा said...

अच्छा लिखा है.
गणपति बब्बा मोरिया अगले बरस फ़िर से आ"
श्री गणेश पर्व की हार्दिक शुभकामनाये .....

अरूणा राय said...

bahut achha

sanju said...

bahut maja aaaaaaaa gaya

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

बहुत सुंदर!

ANWARUL HASAN [VOICE PRODUCTION] said...

DOOSRON KI ZINDAGI MEIN KHUSHIYA LAANE KI KAMNA RAKHNE WALE MANORIYA BHAI KO BADHAI, YAHI BHAWNA HAMEIN EK SACHCHA INSAAN BANATI HAI...MERI CHAUKHAT (Blog) PAR AA KAR UMMEEDON KA DEEP JALANE KE LIYE SHUKRIY.
ANWARUL HASAN
RJ-FMrainbow 100.7 Lucknow
Director- Voice Production

jyoti saraf said...

MAJA A GAYA PRADEEP JI