Thursday, 17 February, 2011

manmohan singh : 21st century's Dhritrashtra





राष्ट्र का गौरव बडा है या कि यह दुर्भाग्य है ।
ताज पहने आज भी बैठा हुआ धृतराष्ट्र है ॥
इटेलियन संजय हुई या गांधारी कौन है ।
इसके जबाब में जनता रही क्यों मौन है ॥
कृष्ण ने रक्षा करी थी द्रोपदी की लाज की ।
कौन अब रक्षा करेगा ये द्रोपदी(*) जो आज की ॥
(*) द्रोपदी= जनता,देश 

प्रदीप मानोरिया

5 comments:

ALOK BHARGAVA said...

good one.

shri krishn saral ki dharti se .
girija kumar mathur ki dharti se
ugta ek aur kavi. sadar naman

प्रदीप मानोरिया said...

thanks alok ji

राजेंद्र अवस्थी said...

सुन्दर पंक्तियाँ, देश की वर्तमान स्थिती को बहुत कम शब्दों में आपने द्र्श्यांकित किया है..

प्रदीप मानोरिया said...

धन्यवाद राजेन्द्र अवस्थी जी आप जैसे गुणी व्यक्तित्व का आशीष मेरे लिये बहुत बडी बात है

devendra khare said...

सुन्दर व्यंग