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Saturday, 11 October 2008

दिल की बीमारी

  • ये जो दिल की बीमारी है
  • किसी को नशा किसी को खुमारी है
  • तो किसी को बन गयी लाचारी है
  • जवानी में जब ये लगता है रोग
  • सुहाती तन्हाई काटते हैं लोग
  • उड़ जाती है भूख और प्यास
  • ऊपर से खुश अन्दर से उदास
  • नींद है गायब ख्वावों में खोया
  • जागते जागते ही लगता है सोया
  • लक्षण है रोग के अत्यन्त गंभीर
  • किंतु नहीं कोई चिकित्सक वीर
  • जो रोग से मुक्ति दिलाये
  • थोड़ी राहत का घूँट पिलाए
  • जवानी के बाद जो हो गए बीत जवान
  • उन्हें बूढा नहीं कहना ही है उनका सम्मान
  • इस बीमारी से बीत जवान हैरान
  • चलने में कभी चढ़ने में परेशान
  • बाहर है साँसों का नियंत्रण
  • नाकाम है दावतों के निमंत्रण
  • बरकरार है भूख और प्यास
  • मिलती है रूखी रोटी सब्जी और घास
  • हलुआ रवडी मिठाई के आते हैं ख्वाव
  • पुराने स्वाद को ही कर लेते हैं याद
  • बेड रेस्ट करो डाक्टर की सलाह
  • दिल की बेजारी नहीं कोई उपाय
  • कमरे में मौजूद एक अदद बीबी
  • सामने कोलाहल परोसती टी वी
  • जवानी में थी फूलों की डाली हीरे की कनी
  • बाजू में बैठी अब लगती है नागफनी
  • वास्तव में
  • राहे इश्क आसान है मुश्किल है डाक्टर की गली
  • दिल की बीमारी तो जवानी वाली ही भली
रचना प्रदीप मनोरिया

Friday, 10 October 2008

मुम्बई उनके बाप की

  • लोकतंत्र की नई परिभाषा, पेश-ऐ-नज़र है आपकी
  • वह बच्चे अब कहने लगे हैं, मुम्बई मेरे बाप की
  • सांस जब लोगे छोड़ोगे, मुंबई में जो आप की
  • उनका भी हिसाब दे देना, मुम्बई जिनके बाप की
  • रोटी खाई कितनी है और, साथ दाल या साग की
  • रखना होगा अब हिसाब क्यों? मुंबई उनके बाप की
  • बच्चो को शाला भेजो या, दफ्तर दुकान जो आपकी
  • कब आना जाना हुआ है कैसे ,मुंबई उनके बाप की
  • साँसे खाना आना जाना ,गणना सब होगी आपकी
  • सबका मालिक एक वही है, मुंबई जिनके बाप की
  • भाषाविद हे ज्ञानी कहना, भाषा क्या कहती आपकी
  • कौन तंत्र मुंबई में लागू मुम्बई जिनके बाप की
  • रचना प्रदीप मानोरिया

Thursday, 9 October 2008

ताजा समाचार सन्दर्भ -

(१)
  • छोड़ दी क्रिकेट 
  • घड़ी कर दिए विकेट 
  • सफलता भी चूमी  
  • देखी हार की भूमि  
  • शर्ट लहराई
  • झंडे सी फहराई 
  • चली जब तक चली  
  • सौरभ गांगुली
  • अब निवृति भली 
  • (२) 
  • क़र्ज़ से परेशान 
  • सूखे से हैरान 
  • आत्म हन्ता किसान
  • मेरा भारत महान  
  • टूटता शेयर बाज़ार 
  • भारी मंदी की मार 
  • न रोज़गार न काम  
  • आत्म हन्ता राजाराम 
  • बच्चों की भूख 
  • लाकर बन्दूक 
  • मार ली गोली
  • बुश की जय बोली  
  • रचना प्रदीप मानोरिया

Sunday, 5 October 2008

नैनो की विदाई

  • अब छोड़ के यह सिंगूर . कि जाना मुझको है अब दूर
  • यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
  • छोड़ के ये बंगाली साया , इसको गुज्जू देश है भाया
  • पहुँच के भुज में बनेगी फ़िर ये सड़कों की जो हूर
  • यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
  • ममता की निर्ममता भारी , मिष्ट स्वाद को किया है खारी
  • रतन जी टाटा की मजबूरी ,जाना है अब दूर
  • यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
  • बेटी बंगाल की हुयी पराई , मोदी के घर हुयी सगाई
  • कच्छ देश में उसी वेश में, चमकेगा फ़िर नूर
  • यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
  • सपना टाटा का बड़ा ही जूना, टूटेगा अब यह कबहू ना
  • कारण टाटा उद्योगों में, रहे सदा ही शूर
  • यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
रचना प्रदीप मानोरिया ०४-१०-२००८ संपर्क ०९४२५१३२०६०

Sunday, 21 September 2008

टी वी सीरियल में नारी

  • सास भी कभी बहू थी कसक कसौटी आदि आदि 
  • सामाजिक मूल्यो की होती हुई बर्बादी 
  • ईर्ष्या और दम्भ से भरे नारी के चरित्र 
  • कुटिलता की कहानी कहते ये चल चित्र
  • पहले तो थी दो एक मन्थरा व कैकेई 
  • अचानक ये टी वी मै सैकडौ कैसै हो गई 
  • स्वेटर बुनने वाली नारी यहॉ जाल बुनती है
  • दूसरे को मात देने की नई नई चाल चुनती है
  • कुटिल कल्पनाएँ  ये तान्डव ये खेल 
  • हमारी सन्सकृति से खाता नही मेल 
  • बिना बलाऊज की पहनी हुई साडिया 
  • वस्त्र के अभाव से जूझती हुई नारिया 
  • टी वी सिनेमा थे हमारी समाज के आइने 
  • आज किन्तु बदल चुके है इसके मायने 
  • अनेकता मै एकता इस देश की मिसाल है 
  • स्टार की एकता का ही चल रहा कमाल है 
  • रचना == प्रदीप मानोरिया 
  • चित्र स्टार टीवी से साभार

Friday, 19 September 2008

मोबाइल और मचछर

  • मोबाइल और उसके उपयोगकर्तआओं की संख्या का आंकडा नये आयाम जोड रहा है /
  • मच्छरों के उत्पादन की गति को भी पीछे छोड रहा है /
  • मोबाइल और मच्छरों में भी समानता है /
  • शायद ये आप में से कोई जानता है /
  • मोबाइल जेब में घनघनाता है /
  • मच्छर कान पर भनभनाता है /
  • मोबाइल जेब से आकर कान को चाट जाता है /
  • मच्छर भिनभिनाकर कहीं भी काट जाता है /
  • मोबाइल अनेक आकारों प्रकारों में आते हैं /
  • मच्छर भी छोटे बडे सब तरह के पाये जाते हैं /
  • मलेरिया डेंगू चिकनगुनिया जैसे रोग मच्छर फैलाता है /
  • मोबाइल स्वंय रोग है और एसेमसेरिया फैलाता है /
  • एसेमसेरिया भी एक संक्रामक रोग है /
  • इसके शिकार मोबाइल कम्यूनिटी के लोग हैं /
  • कोई भी चुटकुला शायरी या न्यूज हो संक्रमण की तरह तैजी से प्रसार पाती है /
  • देखते ही देखते दुनिया भर में प्रचार बन जाती है /
  • अब तो ये एसएमएस सारी सीमायें मर्यादायें तोडचुके हैं /
  • व्यवसायिकता की चादर को चारों ओर से ओढ़ चुके हैं /
  • देश में घटती हुई अच्छी बुरी घटनाओं से अपने को जोड चुके हैं /
  • कुछ बानगी दिखाते हैं आपको भी समझाते हैं /
  • पाँच अंकोवाले नम्बर पर एसएमएस करने में आपको एक ही मिनिट लगता है /
  • किन्तु ऐसे एक एसएमएस से आपका तीन से छह रूपये कटता है /
  • ऐसे एसएमएस बटोरने की ट्रिक भी क्या कमाल है /
  • देश में घटे कोई भी घटना इनको कमाना माल है /
  • कोई भी है खुशहाल अथवा कोई भी परेशान है /
  • संवेदना से शून्य व्यवसायिकता ही इनका ईमान है /
  • लोकल ट्रेन में बमब्लास्ट से किसी का बेटा या पत्नि लापता या घायल है /
  • एसएमएस मंगवाने के लिये ये तो ऐसी ही घटना के कायल हैं /
  • प्रिंस गढ़्ढे में गिरा हुआ है घबराया है /
  • इन्होंने तो इससे ही माल कमाया है /
  • दिल्ली में भले आग लगी है /
  • इनकी तो चांदी ही कटी है /
  • आपसे राय पूछ पूछ कर जेब तो आपकी ही कटी है /
  • कौन बनेगा करौडपति का ये जबरदस्त खेल /
  • अरबपति बना है शाहरूख स्टार या ऐअरटेल /
  • आपको सावधान करना हमारी जिम्मेदारी है /
  • एसएमसेरिया के संक्रमण से बचना ही समझदारी है /
==प्रदीप मानोरिया 
 (चित्र गूगल छवि  खोज से  साभार प्राप्त)

Saturday, 13 September 2008

रिश्ते

  • दिल में छिपी जो बात ,वो ज़ाहिर न कीजिये
  • राज बे-परदा न हो , रुसबा न कीजिये
  • रिश्ता हो अपना कोई भी, हमराज ही रहो
  • रिश्तों की बात है यही , न बदनाम कीजिये
  • चाहे रहो रकीब पर, रिश्ता तो है सही ,
  • इस दुश्मनी को भी "रिश्ता" नाम दीजिये
  • पाकीज़गी खुसूसियत रिश्तों में ये रहे ,
  • ता-उम्र ज़िंदगी में, निभाया ही कीजिये
  • रूह से बनते हैं ये , सांस में मौजूद हैं ,
  • कहना ज़रूरी हो तो , रिश्ता उसे कह दीजिये
  • हैं मुख्तलिफ से नाम मगर काम दो ही हैं ,
  • रिश्तों में या नफरत करो , या प्यार कीजिये
  • मिट जाए ये नफरत सदा सारे जहान से ,
  • हो प्यार बस चारों तरफ़ बस प्यार कीजिये
  • ==प्रदीप मानोरिया
  • रकीब = दुश्मन , पाकीज़गी =पवित्रता, खुसूसियत = विशेषता , मुख्तलिफ = विभिन्न