Showing posts with label television. Show all posts
Showing posts with label television. Show all posts

Sunday, 21 September 2008

टी वी सीरियल में नारी

  • सास भी कभी बहू थी कसक कसौटी आदि आदि 
  • सामाजिक मूल्यो की होती हुई बर्बादी 
  • ईर्ष्या और दम्भ से भरे नारी के चरित्र 
  • कुटिलता की कहानी कहते ये चल चित्र
  • पहले तो थी दो एक मन्थरा व कैकेई 
  • अचानक ये टी वी मै सैकडौ कैसै हो गई 
  • स्वेटर बुनने वाली नारी यहॉ जाल बुनती है
  • दूसरे को मात देने की नई नई चाल चुनती है
  • कुटिल कल्पनाएँ  ये तान्डव ये खेल 
  • हमारी सन्सकृति से खाता नही मेल 
  • बिना बलाऊज की पहनी हुई साडिया 
  • वस्त्र के अभाव से जूझती हुई नारिया 
  • टी वी सिनेमा थे हमारी समाज के आइने 
  • आज किन्तु बदल चुके है इसके मायने 
  • अनेकता मै एकता इस देश की मिसाल है 
  • स्टार की एकता का ही चल रहा कमाल है 
  • रचना == प्रदीप मानोरिया 
  • चित्र स्टार टीवी से साभार