- दिल में छिपी जो बात ,वो ज़ाहिर न कीजिये
- राज बे-परदा न हो , रुसबा न कीजिये
- रिश्ता हो अपना कोई भी, हमराज ही रहो
- रिश्तों की बात है यही , न बदनाम कीजिये
- चाहे रहो रकीब पर, रिश्ता तो है सही ,
- इस दुश्मनी को भी "रिश्ता" नाम दीजिये
- पाकीज़गी खुसूसियत रिश्तों में ये रहे ,
- ता-उम्र ज़िंदगी में, निभाया ही कीजिये
- रूह से बनते हैं ये , सांस में मौजूद हैं ,
- कहना ज़रूरी हो तो , रिश्ता उसे कह दीजिये
- हैं मुख्तलिफ से नाम मगर काम दो ही हैं ,
- रिश्तों में या नफरत करो , या प्यार कीजिये
- मिट जाए ये नफरत सदा सारे जहान से ,
- हो प्यार बस चारों तरफ़ बस प्यार कीजिये
- ==प्रदीप मानोरिया
- रकीब = दुश्मन , पाकीज़गी =पवित्रता, खुसूसियत = विशेषता , मुख्तलिफ = विभिन्न