- अब छोड़ के यह सिंगूर . कि जाना मुझको है अब दूर
- यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
- छोड़ के ये बंगाली साया , इसको गुज्जू देश है भाया
- पहुँच के भुज में बनेगी फ़िर ये सड़कों की जो हूर
- यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
- ममता की निर्ममता भारी , मिष्ट स्वाद को किया है खारी
- रतन जी टाटा की मजबूरी ,जाना है अब दूर
- यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
- बेटी बंगाल की हुयी पराई , मोदी के घर हुयी सगाई
- कच्छ देश में उसी वेश में, चमकेगा फ़िर नूर
- यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
- सपना टाटा का बड़ा ही जूना, टूटेगा अब यह कबहू ना
- कारण टाटा उद्योगों में, रहे सदा ही शूर
- यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
रचना प्रदीप मानोरिया ०४-१०-२००८ संपर्क ०९४२५१३२०६०