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Sunday, 5 October 2008

नैनो की विदाई

  • अब छोड़ के यह सिंगूर . कि जाना मुझको है अब दूर
  • यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
  • छोड़ के ये बंगाली साया , इसको गुज्जू देश है भाया
  • पहुँच के भुज में बनेगी फ़िर ये सड़कों की जो हूर
  • यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
  • ममता की निर्ममता भारी , मिष्ट स्वाद को किया है खारी
  • रतन जी टाटा की मजबूरी ,जाना है अब दूर
  • यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
  • बेटी बंगाल की हुयी पराई , मोदी के घर हुयी सगाई
  • कच्छ देश में उसी वेश में, चमकेगा फ़िर नूर
  • यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
  • सपना टाटा का बड़ा ही जूना, टूटेगा अब यह कबहू ना
  • कारण टाटा उद्योगों में, रहे सदा ही शूर
  • यही नैनो की कहानी है बसा नयनों में पानी है
रचना प्रदीप मानोरिया ०४-१०-२००८ संपर्क ०९४२५१३२०६०