Saturday, 28 February 2009

होली और चुनाव की कॉकटेल

अब के आयो एइसों फाग रेवडी बँट रही चारों ओर |
जाको ओर छोर न दीखे ,बाँटो बाँटो का शोर ||  
कोई वेतन वृद्धि देता कोई टेक्स में छूट | 
जनता का वे माल लुटा कर वोट रहे हैं लूट ||  
अब के आयो एइसों फाग रेवडी बँट रही चारों ओर |  
दुनिया जूझ रही संकट से , यहाँ भरी भर पूर | 
वोटों के लालच में नेता , हुए नशे में चूर || 
अब के आयो एइसों फाग रेवडी बँट रही चारों ओर |
सेवा कर कम करदिया , बढ़ गया वेतनमान | 
कहीं क़र्ज़ माफी हुयी , हुया देश कल्याण || 
अब के आयो एइसों फाग रेवडी बँट रही चारों ओर |
= Pradeep Manoria 

Thursday, 19 February 2009

सुख ?

  • बीत रहा जीवन यूँ ही , 
  • बस सुख की अभिलाषा | 
  • सुख है दुख या फ़िर सुख ,
  • अनभिज्ञ रहा क्या परिभाषा || 
  • तीव्र आकुलित भोक्ता दुःख का , 
  • कम आकुलता क्या यह है सुख ?
  • जग भर जिसको सुख कहता है , 
  • वह सुख है अथवा है दुःख ?  
  • निर्विचार जीवन जीता है , 
  • रत रह व्यर्थ प्रयासों में |
  • सुख की कर कर असत कल्पना ,
  • खुश है सुख आभासों में || 
  • सुख आभासों को सुख कहना ही 
  • उपचारित जग का व्यवहार | 
  • किंतु असलियत क्या है इसकी , 
  • है आवश्यक तनिक विचार ||  
  • भोगी वेदना जब ही प्यास की ,
  • सुखमय तृप्ति देता पानी | 
  • भूख वेदना सहने पर ही 
  • सुस्वादु भोजन सुखदानी || 
  • बिस्तर का संयोग सुखद हो , 
  • जब थकान से व्यथित हुआ |
  • यौन रमण की पीडा बिन तो , 
  • यौन रमण न सफल हुआ ||  
  • पीडा से होकर व्याकुल फ़िर ,
  • जो संयोगों को भोग लिया | 
  • आकुलता की कमी क्षणिक है , 
  • उसको ही सुख मान लिया || 
  • सुखाभास यह न यथार्थ सुख ,
  • पीडा को कम कर देता |
  • पहले पीड़ित होकर प्राणी , 
  • उसको ही सुख कह लेता || 
  • भोगों के साधन पाकर फ़िर ,
  • भोगूं भोगूं आकुलता है | 
  • इसको फ़िर सुख कैसे कह दें , 
  • सुख कहना मूरखता है || 
  • फलित यही होता है अब जो , 
  • इन्द्रिय से भोगे जाते |
  • वे सुख न है वे दुःख के साधन , 
  • जग में सुख वे कहलाते ||  
  • जो इन्द्रिय से पार भोगना ,
  • निज आतम सुख का सागर | 
  • पर से नज़र हटा अन्तर में ,
  • देख लबालब सुख गागर ||
  • नहीं वेदना पीडा कोई , 
  • आकुलता का काम नहीं |
  • है आनंद अनंत अन्दर में ,
  • मात्र निराकुल धाम यही ||
=प्रदीप मानोरिया 09125132060

Tuesday, 3 February 2009

टी वी न्यूज चैनल

  • टी वी न्यूज चैनल की कलाकारी है / 
  • टी आर पी का भूत इन पर तारी है / 
  • सनसनी वारदात जैसे कार्यक्रम / 
  • पैदा करते वीभत्सता डर और भ्रम / 
  • समाज की जागरूकता के नाम पर दे रहे नालेज / 
  • वास्तव में बन गये हैं अपराध सिखाने के कालेज / 
  • हमें समाज को जगाना है ये तो इक बहाना है / 
  • इन्हैं तो अपराध करना सिखाना है / 
  • आपराधिक प्रवृति के ये एंकर / 
  • जिनका व्यक्तित्व ही है भयन्कर / 
  • समाज को ये क्या जगायेंगे / 
  • वीभत्सता ही परोसते रह जायेंगे / 
  • == प्रदीप मानोरिया
  • 09425132060

Thursday, 22 January 2009

आज की फैशन

  • फैशन की दुनिया में जबरदस्त कमाल है |
  • अल्पता और लघुता से आया हुआ भूचाल है |
  • पूर्व के आविष्कारों में स्कर्ट की लंबाई घटती गई |
  • अब स्कर्ट ऊपर से टॉप नीचे से घट जाना है फैशन नई |
  • low waist स्कर्ट या जीन्स show waist टॉप का नया फैशन है |
  • उसकी मोबाइल से फोटोग्राफी लडकों का पेशन है |
  • ऐसे नये फैशन से सुसज्जित कन्यायें |
  • जब सायकिल रिक्शा पर बैठ कर जायें |
  • पीछे चलने वाली मोटर साईकिल की गति मंद और ड्राइवर की ऑंखे फैल जाती हैं |
  • इससे होती हैं सडक दुर्घटनायें और इसमें पेट्रोल की बर्बादी है |
  • इस नई low waist और show waist फैशन से देश का नुकसान है |
  • कपडों की मितव्वियता और पेट्रोल के अपव्यय से देश परेशान है |
प्रदीप मानोरिया 09425132060

Friday, 16 January 2009

जल पुनर्भरण आज की आवश्यक्ता - - WATER HARVESTING

  • सूखता जाता हुआ जल /
  • कुछ तो होगा इसका भी हल /
  • क्या ये प्रश्न करता है उद्वेलित /
  • इसे हल करने कभी हुए प्रेरित /
  • एकांगी रूप से प्रवृत्त व्यवहार में ही लीन हैं /
  • मिलता जहॉं से अरे मात्र लेने में तल्लीन हैं /
  • नीर के उपयोग के संग दुरूपयोग पर भी हैं डटे /
  • धीरे धीरे आज देखो नीर स्त्रोत भी हैं घटे /
  • क्यों नहीं अपनाते हम द्विमार्गी व्यवहार को /
  • जब लेने में हैं जो तत्पर फिर देने भी तैयार हों /
  • उपयोग के बाद व्यर्थ नाली में बहाना पानी को /
  • इंगित करता आगामी परेशानी और नादानी को /
  • जब धरा के स्त्रोत जल से नीर हम लेते रहे /
  • करें मेघ जल वापिस धरा को व्यर्थ अब वह न बहे /
  • मेघ जल अभिषेक करना है धरा का अब यहॉं /
  • अन्यथा भावि समय में जल मिलेगा फिर कहॉं /
  • संग्रहित कर नीर बरखा निकट ही अर्पण करें /
  • घटते स्तर नीर का अब पुनि पुनि अरे वर्धन करें /
  • खर्च जीवन में अनेकों व्यर्थ भी धन जाय है /
  • व्यय करें कुछ धन भी इसमें ये धरा का न्याय है /
THOUGHTS COMPILED BY PRADEEP MANORIA

Saturday, 10 January 2009

बूढी आशा

आशाओं से भरी निगाहें , मन कितना मजबूर है |
तन जर्जर सामर्थ्य नहीं है , दुःख ही दुःख का पूर है ||
सर्द रात तन रहे ठिठुरता , यह दरिद्र संजोग है |
हाथ में चिंदी असमंजस है , क्या इसका उपयोग है ||
चेहरे पर झुर्री का जाला , निर्धनता का नूर है  .......
आशाओं से भरी निगाहें , मन कितना मजबूर है |
तीन पहर तो बीत चुके हैं ,आई जीवन की सांझ है |
इनके लिए तो सुख की जननी , रही सदा ही बाँझ है ||
सुर सरगम मर्सिया हैं गाते , सुख खट्टे अंगूर है ........
आशाओं से भरी निगाहें , मन कितना मजबूर है |
शिशिर बसंत हेमंत शरद , ऋतू सब ही आनी जानी |
अर्ध वस्त्र और भोजन आधा, जीवन की है यही कहानी ||
फ़िर भी जीवन जीते जाते , ईर्ष्या से रह दूर है ...........
आशाओं से भरी निगाहें , मन कितना मजबूर है |
दूर ये नज़रें   देख रही हैं, सुख की कुछ परछाईं हो |
भाग्य  विधाता  को भी शायद याद हमारी आई हो ||
दुःख भोगें  और सपने  देखें इसमे नही कुसूर  है ....
आशाओं से भरी निगाहें , मन कितना मजबूर है |
तन जर्जर सामर्थ्य नहीं है , दुःख ही दुःख का पूर है ||
प्रदीप मानोरिया   अशोकनगर (MP) संपर्क 094 251 32060 
The picture by coutsey of shunya.net  

Wednesday, 7 January 2009

मौसम

मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
आयेंगे वो जो पास, मेरे इंतज़ार है |
वो दूर नहीं पास मेरे जान लीजिये |
है चश्म में रूख वो हसीं मेरे आज है |
मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
जुल्फों के पेंचों खम है भला स्याह क्यूं बडे |
दिन में हुई है शाम यहॉं गुल की बहार है |
मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
दिल की करें क्या बात भला इश्क के सिवा |
तेरा ही है वज़ूद यहॉं उसका खुमार है |
मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
तन्हाइयों में याद तेरी क्यों इतना सताती |
आ जाओ अब ना देर करो दिल बेकरार है |
मौसम का ये मिज़ाज हुआ खुशगवार है |
आयेंगे वो जो पास मेरे इंतज़ार है |
प्रदीप मानोरिया 
09425132060

Monday, 5 January 2009

टी वी सीरियल्स एकता स्टाइल

पारिवारिक पृष्ठ भूमि की कहानियों पर आधारित / 
आजकल चल रहे टी वी के धारावाहिक /
समाज में खूब छा रहे हैं / 
शायद सभी को भा रहे हैं / 
भारतीय संस्कृति की संकेत मात्र साडियॉं / 
ब्लाउज की आवश्यकता को नकारती टीवी की नारियॉं /
वक्रता के भाव चेहरे पर सजाये / 
अपने शारीरिक सौष्ठव को दर्शायें / 
कुटिलतायें और षडयंत्र /
इनकी सफलता का मंत्र / 
इतना ही नहीं काफी आगे और भी देखिये / 
नयनों के साथ कानों को भी सेंकिये / 
सामान्य से माहौल में साधारण से संवाद / 
पार्श्व में चलती हुई कानफोडू आवाज / 
तेज नगाडे और तलवार के खींचे जाने के स्वर / 
प्रतीत होता मानो आया युध्द का अवसर / 
चाय पीते हुये या कुछ खाते हुये टीवी देखो / 
कर्णफाड संगीत से खिसियाकर कप ही फैंको /
टीवी के किसी पात्र को यदि हार्ट अटैक आया है / 
पार्श्व में नगाडा और झिंगझांग बजाया है / 
ऐसा लगता है हार्ट अटैक नहीं आया है / 
मानो यमराज सेना लेकर सीधा ही चला आया है / 
आपके घर में है यदि अच्छी और बडी सी टीवी / 
और साथ में है सीरियल पसंद करने वाली बीबी / 
बेहतर कि कान में लगाने को रुई ले आयें /
दिल मन और चित्त में शांति पायें / 
साथ ही >>> सीरियल निर्माताओं से गुजारिश है और इतना ही चाहें /
दिखाने में आप स्वतंत्र हैं कितना भी दिखायें / 
किन्तु पार्श्व संगीत में थोडी कमी अवश्य लायें / 
==प्रदीप मानोरिया
09425132060

Tuesday, 30 December 2008

स्वागत -२००९ - प्रदीप मानोरिया

 
नव  वर्ष  में  वंदन नया , 
उल्लास  नव आशा  नई  |
हो भोर नव आभा  नई, 
रवि  तेज  नव ऊर्जा  नई |
विश्वास  नव उत्साह  नव,
नव चेतना उमंग नई |
विस्मृत जो बीती  बात है ,
संकल्प  नव परनती  नई |
है भावना  परिद्रश्य  बदले , 
अनुभूति नव हो सुखमई |
किंतु हालात  क्या  होते हैं :---
सरकार  नव आकार  नव ,
नेता  नया बातें वही |
दुश्मनी की परम्परा वह , 
जो पडौसी भाई वही |
खेल चूहा बिल्ली का ,
चूहा वही बिल्ली वही |
हमले वह आतंक वो ही,
जेहाद औ मज़हब वही |
मुखिया वही करता वही ,
कहता मैं मुखिया नहीं |
कुछ कर सके सरकार मेरी, 
दिखता उसे कुछ हल नहीं |
अथवा सब कुछ जानते , 
किंतु अरे हिम्मत नहीं |
स्वच्छता का  भरते दम , 
जो स्वच्छ साँसे भी नहीं |
देश की कीमत  नहीं है , 
घूस  औ रिश्वत वही |
है समय का बीतना ही, 
समय की नियति यही |
है नियत सब कुछ जगत में , 
जो हो रहा सब है सही |
==प्रदीप मानोरिया 
094 251 32060 
चूहा - बिल्ली का खेल = भारत पकिस्तान के परस्पर हालात

Friday, 26 December 2008

धक्का-अष्टक = प्रदीप मानोरिया

धक्का की महिमा बड़ी , करना सोच विचार |
धक्के  से ही होत हैं,  काम अनेक हज़ार ||
धक्के से ही चल रही हिंद देश सरकार |
मेडम धक्का देत हैं , ड्राइवर है सरदार ||1||
धक्का मंदी का पायकर , औंधा शेयर बाज़ार |
अब तेज़ी का मुंह तके , धक्के का इंतज़ार ||2||
इस मंदी के धक्के से , बचा ना कच्चा तेल |
नित नित नीचे दाम हैं , यह धक्के का खेल ||3||
वोटों का धक्का पायकर, बने विधायक आज |
हर नेता यह चाहता , सबको धक्के की आस ||4||
धक्के से चालू करें , जूनी मोटर कार |
ड्राइवर बैठा सीट पर , मालिक धक्कादार ||5||
सुख स्पर्श की चाह में , दिन भर फिरें बाज़ार |
कोहनी धक्का मुक्की से , लहते सुक्ख अपार ||6||
नव दुल्हन है रूम में , दूल्हा खडा है द्वार |
भाभी धक्का देय तो , पहुंचे सुख संसार ||7||
वर्णन धक्का जो सभी , नहीं यहाँ उपयुक्त |
आप विचारें, जान लें , सोच आपकी मुक्त ||8||
= प्रदीप मानोरिया 
0-94-251-32060

Tuesday, 23 December 2008

दोस्त और बचपन की यादें = Pradeep Manoria

दोस्त तेरी याद बहुत आती है / 
यादें तेरी या उन लम्हों की 
जो बिताये थे तेरे साथ बचपन में /
आज भी ताजा हैं वे याद पचपन में /
दोस्त तेरी याद बहुत आती है /  
स्कूल से गोल मार अमरूद के बगीचे में /
दौड्ते दौड्ते जामफ़ल तोडते / 
माली का डर भी मन में भरा हुआ / 
पेड से गिरने के डर से डरा हुआ / 
यादें आज भी मन को हर्षाती हैं / 
दोस्त तेरी याद बहुत आती है /  
स्कूल के बाहर चाट के ठेले /
बेर कि डलिया और केले / 
खाते खिलाते चिढाते खिलखिलाते / 
पेड की छॊंव मे बैठे बतियाते /
बचपन की बातें भूल नहीं पातीं हैं 
दोस्त तेरी याद बहुत आती है / 
..............प्रदीप मानोरिया 
094-251-32060

Saturday, 20 December 2008

ताजे दोहे

 
दिल्ली :-
देत दुहाई जो रहे , मानव के अधिकार |
निरस्त पोटा कर दिया ,मनमोहन सरकार ||
नीर समान बहता रहा,निर्दोषों का खून  |
बस वोटों के लोभ में ,टांग दिया क़ानून ||
हमले आतंकी हुए ,बढ़ने लगा दबाब |
तब जाके जागे कहीं, टूटे लोभ के ख्वाव ||
नए नाम नई जिल्द में ,प्रस्तुत वही किताब |
पुन: वही क़ानून अब , वाह मनमोहन साब ||
राजस्थान :-
लोकतंत्र का हो रहा , कैसा ये उपहास |
अनपढ़ भी मंत्री बनी ,वाह कुर्सी की प्यास ||
पाकिस्तान :-
ये कसाब है पाक का , कहने लगे नवाज़ |
जो सबूत थे मांगते , उनकी यह आवाज़ ||
= प्रदीप मानोरिया 
09425132060

Thursday, 18 December 2008

अथ- जूता वृत्तांत

इक नए इतिहास का निर्माण हो गया |
दुनिया में जूता भी महान हो गया ||
नज़दीक जब आने लगी विदाई की घड़ी |
आफत ये जूता लिए हाथ में खडी ||
बुश की ओर लक्ष्य से सम्मान हो गया |
दुनिया में जूता भी महान हो गया ||
साध लक्ष्य फ़िर जब जैदी ने जूते मारे |
त्वरित गति से झुककर नीचे बच पाये बेचारे ||
नीच क्रिया से मज़हब का सम्मान हो गया |
दुनिया में जूता भी महान हो गया ||
जैदी का यह जूनून मज़हब में नेक है |
पिट कर हुए बेहाल हाड पसली एक है ||
पिटना भी जैदी का ईमान हो गया |
दुनिया में जूता भी महान हो गया ||
क्लिंटन ने पाई विदा मोनिका को चूम के |
बुश ने तो पाया जूता विदाई में झूम के |
जूते का करोड़ों का दाम हो गया 
दुनिया में जूता भी महान हो गया ||
=प्रदीप मानोरिया  094-251-32060

Monday, 8 December 2008

दंगल के बाद --- प्रदीप मानोरिया

कोई खुश तो कोई खीजा और कोई खामोश है |
मतगणना के परिणामों  से कहीं रोष या जोश है ||
शिव शीला और रमन सिंह ने सत्ता पाई दोबारा है |
जीत गए नेता खुश होते , वोटर फ़िर भी हारा है  ||
राजस्थान में मौजूदा पर नहीं किया विश्वास है  |
वसुंधरा मायूस हुईं क्या,क्या टूटी अब आस है ||
वादों का धर भार कंधे पर पहुंचे सत्ता के पास हैं |
वे वादों को भले ही भूलें , वोटर रखता आस है ||
आस धरे वोटर बैठा है , होता सदा निराश है |
नेता को सता सुख प्यारा, नोट अरु वोट चटास है ||
बड़े बड़े दिग्गज भी  हारे , जो आशा पर जीते हैं |
आज हुआ माहौल जो ऐसा, भरी दुपहरी पीते हैं || 
नये नए चेहरे भी जीते ,दंगल इसी चुनावी में |
कुछ की नैया पार लगी है, चलती लहर प्रभावी में ||
नए विधायक खुशी  असीमित, दिखता भारी जोश है |
मतगणना के परिणामों ने फैलाया आगोश है  || 
कोई खुश तो कोई खीजा और कोई खामोश है |
मतगणना के परिणामों  से कहीं रोष या जोश है ||
=प्रदीप मानोरिया  09425132060