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Thursday, 18 December 2008

अथ- जूता वृत्तांत

इक नए इतिहास का निर्माण हो गया |
दुनिया में जूता भी महान हो गया ||
नज़दीक जब आने लगी विदाई की घड़ी |
आफत ये जूता लिए हाथ में खडी ||
बुश की ओर लक्ष्य से सम्मान हो गया |
दुनिया में जूता भी महान हो गया ||
साध लक्ष्य फ़िर जब जैदी ने जूते मारे |
त्वरित गति से झुककर नीचे बच पाये बेचारे ||
नीच क्रिया से मज़हब का सम्मान हो गया |
दुनिया में जूता भी महान हो गया ||
जैदी का यह जूनून मज़हब में नेक है |
पिट कर हुए बेहाल हाड पसली एक है ||
पिटना भी जैदी का ईमान हो गया |
दुनिया में जूता भी महान हो गया ||
क्लिंटन ने पाई विदा मोनिका को चूम के |
बुश ने तो पाया जूता विदाई में झूम के |
जूते का करोड़ों का दाम हो गया 
दुनिया में जूता भी महान हो गया ||
=प्रदीप मानोरिया  094-251-32060

Wednesday, 8 October 2008

शेयर बाज़ार

  • शेयर बाजारी कारोबारी टूट गयी सब आस
  • बनी चवन्नी जो था रुपया रोऊँ किसके पास
  • अरे बुश की बलिहारी है चोट ये बड़े करारी है
  • संभल न पाया गोता खाया महल बना जो ताश
  • बड़ों बड़ों के छक्के छूटे चेहरा हुआ उदास
  • अरे बुश की बलिहारी है चोट ये बड़े करारी है
  • तीव्र गति से मंद मति से चाहें करें विकास
  • ओंधें मुंह बाज़ार पडा है कारण क्या है ख़ास
  • अरे बुश की बलिहारी है चोट ये बड़े करारी है
  • मंदी हालत भाग्य को लानत हुया ये सत्यानाश
  • धंधा ये आराम का जंचता अन्य न आता रास
  • अरे बुश की बलिहारी है चोट ये बड़े करारी है
  • प्रदीप मानोरिया संपर्क ०९४२५१३२०६०

Friday, 3 October 2008

१२३ परमाणु करार

  • आज हमारे पडौसी श्री राम अवतार
  • भोर ही पधारे लेकर गरमागरम अखवार
  • बोले भाई साहेब बहुत बहुत बधाई
  • कहकर जलेबी की पुडिया आगे बढाई
  • मैंने प्रश्नवाचक भंगिमा बनाई
  • तब उन्होंने ख़बर सुनाई
  • जिसके लिए प्रधानमंत्री जी थे बेकरार
  • आख़िर हो ही गया वो परमाणु करार
  • राम अवतार ने अपना मुंह फ़िर खोला
  • और बड़े विश्वास से बोला
  • कि देश की जनता अब लाभ उठाएगी
  • बिजली की कटौती कम हो जायेगी
  • पूरी बिजली और पानी की समस्या सुलझेगी
  • परेशान जनता भी अब चैन से रह लेगी
  • मंहगाई जो छु रही थी आसमान
  • उस पर भी कसेगी अब कमान
  • मैंने तब राम अवतार के सपनो को विराम दिया
  • जैसे तैसे मिथ्या आशावादी रामअवतार को चुप किया
  • मैंने कहा अरे राम अवतार ज़रा मेरी भी सुनो
  • सुबह सुबह से ही शेखचिल्ली मत बनो
  • जो बिजली पानी की समस्या और मंहगाई का बुखार है
  • उसका कारण अराजकता और भ्रष्टाचार है
  • यह परमाणु करार तुम्हारे काम का नहीं है
  • इससे हम तुम को कोई आराम नहीं है
  • यह तो मुद्दे की जड़ से उत्पन्न दंभ का परिणाम है
  • हम तो उतने ही मजबूर है इससे हमारा क्या काम है रचना प्रदीप मानोरिया