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Saturday, 20 December 2008

ताजे दोहे

 
दिल्ली :-
देत दुहाई जो रहे , मानव के अधिकार |
निरस्त पोटा कर दिया ,मनमोहन सरकार ||
नीर समान बहता रहा,निर्दोषों का खून  |
बस वोटों के लोभ में ,टांग दिया क़ानून ||
हमले आतंकी हुए ,बढ़ने लगा दबाब |
तब जाके जागे कहीं, टूटे लोभ के ख्वाव ||
नए नाम नई जिल्द में ,प्रस्तुत वही किताब |
पुन: वही क़ानून अब , वाह मनमोहन साब ||
राजस्थान :-
लोकतंत्र का हो रहा , कैसा ये उपहास |
अनपढ़ भी मंत्री बनी ,वाह कुर्सी की प्यास ||
पाकिस्तान :-
ये कसाब है पाक का , कहने लगे नवाज़ |
जो सबूत थे मांगते , उनकी यह आवाज़ ||
= प्रदीप मानोरिया 
09425132060