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Monday, 8 December 2008

दंगल के बाद --- प्रदीप मानोरिया

कोई खुश तो कोई खीजा और कोई खामोश है |
मतगणना के परिणामों  से कहीं रोष या जोश है ||
शिव शीला और रमन सिंह ने सत्ता पाई दोबारा है |
जीत गए नेता खुश होते , वोटर फ़िर भी हारा है  ||
राजस्थान में मौजूदा पर नहीं किया विश्वास है  |
वसुंधरा मायूस हुईं क्या,क्या टूटी अब आस है ||
वादों का धर भार कंधे पर पहुंचे सत्ता के पास हैं |
वे वादों को भले ही भूलें , वोटर रखता आस है ||
आस धरे वोटर बैठा है , होता सदा निराश है |
नेता को सता सुख प्यारा, नोट अरु वोट चटास है ||
बड़े बड़े दिग्गज भी  हारे , जो आशा पर जीते हैं |
आज हुआ माहौल जो ऐसा, भरी दुपहरी पीते हैं || 
नये नए चेहरे भी जीते ,दंगल इसी चुनावी में |
कुछ की नैया पार लगी है, चलती लहर प्रभावी में ||
नए विधायक खुशी  असीमित, दिखता भारी जोश है |
मतगणना के परिणामों ने फैलाया आगोश है  || 
कोई खुश तो कोई खीजा और कोई खामोश है |
मतगणना के परिणामों  से कहीं रोष या जोश है ||
=प्रदीप मानोरिया  09425132060