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Tuesday, 30 December 2008

स्वागत -२००९ - प्रदीप मानोरिया

 
नव  वर्ष  में  वंदन नया , 
उल्लास  नव आशा  नई  |
हो भोर नव आभा  नई, 
रवि  तेज  नव ऊर्जा  नई |
विश्वास  नव उत्साह  नव,
नव चेतना उमंग नई |
विस्मृत जो बीती  बात है ,
संकल्प  नव परनती  नई |
है भावना  परिद्रश्य  बदले , 
अनुभूति नव हो सुखमई |
किंतु हालात  क्या  होते हैं :---
सरकार  नव आकार  नव ,
नेता  नया बातें वही |
दुश्मनी की परम्परा वह , 
जो पडौसी भाई वही |
खेल चूहा बिल्ली का ,
चूहा वही बिल्ली वही |
हमले वह आतंक वो ही,
जेहाद औ मज़हब वही |
मुखिया वही करता वही ,
कहता मैं मुखिया नहीं |
कुछ कर सके सरकार मेरी, 
दिखता उसे कुछ हल नहीं |
अथवा सब कुछ जानते , 
किंतु अरे हिम्मत नहीं |
स्वच्छता का  भरते दम , 
जो स्वच्छ साँसे भी नहीं |
देश की कीमत  नहीं है , 
घूस  औ रिश्वत वही |
है समय का बीतना ही, 
समय की नियति यही |
है नियत सब कुछ जगत में , 
जो हो रहा सब है सही |
==प्रदीप मानोरिया 
094 251 32060 
चूहा - बिल्ली का खेल = भारत पकिस्तान के परस्पर हालात

Friday, 28 November 2008

मुम्बई २६/११ दहशतगर्दी

पाक तेरी नापाक  निगाहें,  क्या करता इन पर तू नाज़ |
यद्यपि शासन सुप्त हमारा , किंतु जनता जागृत  आज ||
कायर सा ये कदम तुम्हारा , कुत्सित नीयत दिखाई है |
दहशत गर्दी खेल ये खूनी,  मानवता बिसराई है  ||
हिम्मत नहीं सामने आओ , क्यों ना आती तुमको लाज |
पाक तेरी नापाक निगाहें , क्या करता इन पर तू नाज  ||
जो हिस्सा इस तन का ही है , छवि स्वच्छ है दिखलाता |
बाहर से भोंदू बनकर जो , आतंकी हमले करवाता ||
शान हमारी मुम्बई की जो , कहलाता है होटल ताज |
पाक तेरी नापाक  निगाहें,  क्या करता इन पर तू नाज़ |
हम शर्मिन्दा मेहमानों के प्रति , यह संस्कृति हमारी है |
खूनी होली खेलने वाले , क्या ये संस्कृति तुम्हारी है  ||
सीधी अंगुली घी  ना निकले , सीधे सीधे  आओ ना  बाज |
पाक तेरी नापाक  निगाहें,  क्या करता इन पर तू नाज़ |
जो अपनो से विछड गए हैं , ह्रदय चुभी उनकी यह पीर |
दहशत गर्दो ओ आतंकी , तुम लगते संवेदनहीन ||
जिंदा वे  जो हैं संवेदी , तुम पत्त्थर या हो तुम लाश |
पाक तेरी नापाक  निगाहें,  क्या करता इन पर तू नाज़ |
यद्यपि शासन सुप्त हमारा , किंतु जनता जागृत  आज ||
===प्रदीप मानोरिया