- आज हमारे पडौसी श्री राम अवतार
- भोर ही पधारे लेकर गरमागरम अखवार
- बोले भाई साहेब बहुत बहुत बधाई
- कहकर जलेबी की पुडिया आगे बढाई
- मैंने प्रश्नवाचक भंगिमा बनाई
- तब उन्होंने ख़बर सुनाई
- जिसके लिए प्रधानमंत्री जी थे बेकरार
- आख़िर हो ही गया वो परमाणु करार
- राम अवतार ने अपना मुंह फ़िर खोला
- और बड़े विश्वास से बोला
- कि देश की जनता अब लाभ उठाएगी
- बिजली की कटौती कम हो जायेगी
- पूरी बिजली और पानी की समस्या सुलझेगी
- परेशान जनता भी अब चैन से रह लेगी
- मंहगाई जो छु रही थी आसमान
- उस पर भी कसेगी अब कमान
- मैंने तब राम अवतार के सपनो को विराम दिया
- जैसे तैसे मिथ्या आशावादी रामअवतार को चुप किया
- मैंने कहा अरे राम अवतार ज़रा मेरी भी सुनो
- सुबह सुबह से ही शेखचिल्ली मत बनो
- जो बिजली पानी की समस्या और मंहगाई का बुखार है
- उसका कारण अराजकता और भ्रष्टाचार है
- यह परमाणु करार तुम्हारे काम का नहीं है
- इससे हम तुम को कोई आराम नहीं है
- यह तो मुद्दे की जड़ से उत्पन्न दंभ का परिणाम है
- हम तो उतने ही मजबूर है इससे हमारा क्या काम है रचना प्रदीप मानोरिया