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Tuesday, 14 October 2008

हेंड वाश डे बनाम आदत या कहावत

  • कोई ना कोई तो ऐसी सूरत है
  • जिससे ये हेंड वाश जरूरत है
  • हाथ धोना सफाई की एक आदत है
  • हाथ धो कर पीछे पढ़ना एक कहावत है
  • भले लोगों में ये हो न हो हाथ धोने की आदत
  • किंतु चरितार्थ खूब होती है हाथ धोकर पीछे पड़ने की कहावत
  • मंदी शेयर बाज़ार के पीछे हाथ धोकर पडी है
  • मंहगाई भी हाथ धोकर आसमान पर जा चढी है
  • टिकिटअर्थी अपने आका के पीछे हाथ धोकर पड़े हैं
  • जिन्हें नही मिलता वे बाहर हाथ मलते हुए खड़े हैं
  • गरीब के पीछे पडी है हाथ धोकर बीमारी
  • मंहगा इलाज़ मुश्किल कौन देखे विवशता और लाचारी
  • ग़रीब बाप की कन्या बैठी है आज भी कुंवारी
  • हाथ धोकर पीछे पडी है उसकी लाचारी
  • इधर प्रशासन हाथ धोकर पीछे पडा है हाथ धुलाने को
  • मास्टर लगा है अपनी जेब से साबुन तोलिया जुटाने को
  • सार्थकता इस दिन की है कि कुछ सीख जाएँ इस आदत को
  • वरना तो सब कुछ ही न्योछावर है इस कहावत को
रचना प्रदीप मानोरिया 15th अक्टूबर 2008

Monday, 13 October 2008

कलेंडर (Calendar)

  • विषय, वर्ग और आदतों को बढावा देने नए प्रकार का कलेंडर बुना
  • हर एक के दिवस को मनाने कोई न कोई दिन चुना 
  • इस प्रकार राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ये विभिन्न दिवस मनाये जाते है 
  • वे कभी शिक्षक दिवस, हास्य दिवस या मातृ दिवस कहलाते है 
  • किंतु यह बिडम्बना है आज की
  • अथवा खुमारी है समाज की 
  • अब स्वयं शिक्षक ही शिक्षक दिवस मनाता है 
  • स्वयं ही दरी जाजम और कुर्सी बिछाता है 
  • इन्जीनीर्यस ही इन्जीनीर्यस डे का करते हैं आयोजन 
  • एक मुख्य अतिथि कुछ जलपान या भोजन 
  • हास्य दिवस पर हंसने वाले इकठ्ठे हो जाते है
  • हंसने वालों को हंसने के फायदे समझाते हैं 
  • हिन्दी दिवस की भी भिन्न नही बीमारी है 
  • इसे मनाने की कलमकार की ही जिम्मेदारी है 
  • वे कलमकार श्रोताविहीन कक्ष में करते हैं विचार
  • परस्पर हिन्दी का दुखडा रोकर कर लेते हैं स्वल्पाहार  
  • गर ऐसा ही आलम रहा बरकरार 
  • सोता रहा समाज और ऊंघती रही सरकार 
  • तो फ़िर शहीद दिवस कैसे मनाया जायेगा ?
  • इसे मनाने क्या कोई शहीद यहाँ वापिस आयेगा ?  
  • रचना प्रदीप मनोरिया