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Saturday, 15 November 2008

भारतीय लोकतंत्र - Pradeep Manoria

राजतंत्र  को हटा प्रजा का लोकतंत्र ले आए | 
प्रगति स्वप्न को भूल ,मंत्र बापू नेहरू के भुलाए ||
समय चक्र के चलते साल हैं साथ बिताये |
किंतु नहीं आकलन इसका पहुँच कहाँ हम पाये ||
भ्रष्टाचार का भूत बहुत नेताओं पर मंडराए |
बहुत हैं अफसर बाबू चपरासी वे भी नहीं बच पाये ||
नेता सत्ता का ऐसा प्रेमी दिन भर स्वप्न सजाये |
करे नोट वोटों की तिजारत ,देश भाड़ में जाए ||
अफसर देश चलाते हैं पर नोट देख ललचायें |
निष्ठा खूंटी पर टांग अरे ये किंचित न शर्मायें ||
लोकतंत्र का चढ़ा मुखौटा लालफीत ही चलायें |
सेवा,पूजा,घूस-ओ-रिश्वत जनता रोज चढाये ||
सरकार हुयी स्वचालित हमारी चालक सोता जाए |
देश की जनता करे सवारी पल पल झटके खाए ||
प्रदीप मानोरिया 
संपर्क 094 25132060 

Wednesday, 12 November 2008

भ्रष्टाचार के अनेक रंग

एक उच्च पद पर आसीन शासकीय अधिकारी / 
मंह्गे मोबाइल लम्बी गाडी से लेस सूट धारी / 
जीवन में हैरान परेशान तनाव से ग्रस्त / 
भाग दौड और अनजाने भय से त्रस्त / 
दोस्त की सलाह पर तथाकथित  बाबा के पास धाये / 
चरणों में कर नमोस्तु अपनी व्यथा सुनाये / 
बाबा ने कहा एक काम कीजिये आप / 
सुरा सुन्दरी सहित छोड दीजिये पाप / 
अफ़सर ने कहा बाबा जरूर / 
मुझे आपका आदेश मंजूर / 
लेकिन एक चीज से बहुत घबराता हूं / 
आप कहें तो आपको बताता हूं / 
मैं ऐसे विभाग में हूं मेरी ऊपरी कमाई मजबूरी है / 
ना भी चाहूं तो भी ये जरूरी है / 
मैं इस पाप से बहुत घबराता हूं /
छोडना चाहता हूं नहीं छोड पाता हूं 
मै करना चाह्ता हूं प्रायश्चित / 
कोई उपाय बतायें उचित / 
बाबा ने कहा उपाय बहुत सहज और आसान है / 
बच्चा क्यों इतनी सी बात से परेशान है / 
परेशानी छोड और बिल्कुल नहीं घबराना / 
अपनी ऊपरी कमाई का चौथाई हिस्सा यहॉं भिजवाना / 
तेरे सारे पाप हो जायेंगे साफ़ / 
दान धर्म से हो जायेंगे माफ / 
 PRADEEP MANORIA
09425132060

Wednesday, 27 August 2008

पार्लियामेंट हंगामा

सब्जी मंडी का शोर संक्रमण बा- रास्ता शेयर बाजार /
संसद में भी जा पहुंचा है वाह रे हिन्दुस्तान /
रूप चन्द की चमक देख संग साथ हुए सरकार /
वही घटक हंगामा करते वाह रे हिन्दुस्तान /
दुश्मन के दुश्मन से दोस्ती ये इनका आधार /
टांग खींचते ऐसे दोस्त की वाह रे हिन्दुस्तान /
अपनी जेब की पहले पूजा कैसे चले सरकार /
नहीं देश की कोई चिन्ता वाह रे हिन्दुस्तान /
नीति की हदें पार कर राजनीति अब बनी बजार /
निज नीति ही राजनीति है वाह रे हिन्दुस्तान /
क्या है शराफत, क्या इसकी हद, कोई नहीं विचार /
चौपाये सम लडते रहते वाह रे हिन्दुस्तान /
क्या है जरूरत अब विपक्ष की साथी जो सरकार /
वही पक्ष है अरू विपक्ष वो वाह रे हिन्दुस्तान /
== प्रदीप मानोरिया