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Saturday, 15 November 2008

भारतीय लोकतंत्र - Pradeep Manoria

राजतंत्र  को हटा प्रजा का लोकतंत्र ले आए | 
प्रगति स्वप्न को भूल ,मंत्र बापू नेहरू के भुलाए ||
समय चक्र के चलते साल हैं साथ बिताये |
किंतु नहीं आकलन इसका पहुँच कहाँ हम पाये ||
भ्रष्टाचार का भूत बहुत नेताओं पर मंडराए |
बहुत हैं अफसर बाबू चपरासी वे भी नहीं बच पाये ||
नेता सत्ता का ऐसा प्रेमी दिन भर स्वप्न सजाये |
करे नोट वोटों की तिजारत ,देश भाड़ में जाए ||
अफसर देश चलाते हैं पर नोट देख ललचायें |
निष्ठा खूंटी पर टांग अरे ये किंचित न शर्मायें ||
लोकतंत्र का चढ़ा मुखौटा लालफीत ही चलायें |
सेवा,पूजा,घूस-ओ-रिश्वत जनता रोज चढाये ||
सरकार हुयी स्वचालित हमारी चालक सोता जाए |
देश की जनता करे सवारी पल पल झटके खाए ||
प्रदीप मानोरिया 
संपर्क 094 25132060