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Thursday, 5 August 2010

हरियाली

गहरे और घने मेघों की सौगात धरा पर आई है
वन उपवन आँगन के गमले सब हरियाली छाई है
जहाँ अवनि पर कण माटी के बिछी पूर हरियाली है
और गगन पर रवि लोप है घटा खूब ही काली है
प्रदीप मानोरिया
चित्र साभार श्रीमति किरन नितिला राज पुरोहित

Tuesday, 23 June 2009

कब आओगे मेघ और फिर कब बरसोगे

  • राह तकत नयना थके, सतत जोहते बाट |
  • माह अषाढ़ भी जा रहा , नहीं आई बरसात ||
  • तपन नहीं अब सहन है , अब आये मानसून |
  • छींटे भी दुर्लभ हुए, बीत चला है जून ||
  • चार माह से कृपा बहुत , हे रवि तुमरा तेज़ |
  • रात हुए भी चुभत है , गरम गरम यह सेज ||
  • नहीं चैन दीखत कहीं , नहीं दीखते मेघ |
  • बिन बदरा बैचन सब , असह्य ग्रीष्म का वेग ||
  • शासन में भी उलझ रहा , अबकी ऐसा पेंच |
  • बिजली पानी की कमी , मानसून की खेंच ||
  • मेघ राज सुन लीजिये , हमरी करुण पुकार |
  • अब तो दर्शन दीजिये ,सुगम चले सरकार ||
  • =Pradeep Manoria