- राह तकत नयना थके, सतत जोहते बाट |
- माह अषाढ़ भी जा रहा , नहीं आई बरसात ||
- तपन नहीं अब सहन है , अब आये मानसून |
- छींटे भी दुर्लभ हुए, बीत चला है जून ||
- चार माह से कृपा बहुत , हे रवि तुमरा तेज़ |
- रात हुए भी चुभत है , गरम गरम यह सेज ||
- नहीं चैन दीखत कहीं , नहीं दीखते मेघ |
- बिन बदरा बैचन सब , असह्य ग्रीष्म का वेग ||
- शासन में भी उलझ रहा , अबकी ऐसा पेंच |
- बिजली पानी की कमी , मानसून की खेंच ||
- मेघ राज सुन लीजिये , हमरी करुण पुकार |
- अब तो दर्शन दीजिये ,सुगम चले सरकार ||
- =Pradeep Manoria
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Tuesday, 23 June 2009
कब आओगे मेघ और फिर कब बरसोगे
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