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Sunday, 21 June 2009

पिताजी - एक श्रद्धांजलि

  • अपनो के विछोह से |
  • बंधे जिनके मोह से |
  • उनके अवसान से |
  • जीव के प्रयाण से |
  • दुख की गहराई है |
  • याद बहुत आई है |
  • जितना मैं भुलाता हूँ |
  • भूल नहीं पाता हूँ |
  • मुझ पे उनका साया था |
  • हाथों से मुझे खिलाया था |
  • धूप में कुम्हलाता हूँ |
  • कुछ सोच नहीं पाता हूँ |
  • कैसे अब जी पाऊँगा |
  • नहीं भुला पाऊँगा |
  • नहीं भुला पाऊँगा, नहीं भुला पाऊँगा |
=प्रदीप मानोरिया

Thursday, 30 October 2008

बुजुर्ग छांव

  • अपनो के विछोह से /
  • बंधे जिनके मोह से / 
  • उनके अवसान से /
  • जीव के प्रयाण से /
  • दुख की गहराई है / 
  • याद बहुत आई है / 
  • जितना मैं भुलाता हूँ /
  • भूल नहीं पाता हूँ / 
  • मुझ पे उनका साया था /
  • हाथों से मुझे खिलाया था / 
  • धूप में कुम्हलाता हूँ /
  •  सोच नहीं पाता हूँ /
  • कैसे अब जी पाऊँगा /
  • नहीं भुला पाऊँगा / 
  • नहीं भुला पाऊँगा, नहीं भुला / पाऊँगा 
Pradeep Manoria 
094-251-32060