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Tuesday, 30 June 2009

सियासत

  • फिर वही राज वही काज वही मंहगाई है |
  • हिंद में कठपुतली ने फिर से कुर्सी पाई है ||
  • वही मेडम वही गुड्डा वही है डोर हाथों में |
  • फर्क इतना कि कुछ मजबूती हाथ आई है ||
  • हिंद में रेल समझोते से चली है अब तो |
  • या बिहारी या कि बंगाली ने इसे चलाई है ||
  • खुद पे ज्यादा भरोसा नहीं लाजिम मेरे दोस्त |
  • इस अति भरोसे में ही सांई ने मुंह की खाई है ||
  • बिल्ली खिसिया के नोचती है खम्बा |
  • बात ये ही है जिससे छिड़ी लड़ाई है ||
=Pradeep Manoria
चित्र vibhutipandya.blogspot.com से साभार

Tuesday, 7 October 2008

कांग्रेसी दोहे

  • पार्टी जो कांग्रेस है मैडम आलकमान | 
  • अबकी से तो कर दिया , जारी ये फरमान ||
  • नेताओं ने मिल किया, पार्टी बंटाढार | 
  • अत: टिकिट बांटे सभी योग्यता के अनुसार ||
  • किंतु मध्यप्रदेश में नेता सात प्रधान | 
  • स्वयं बैठ मिल कर लिया कोटे का निर्माण ||
  • उपकृत निज चमचे रहें अत: धरा ये स्वांग | 
  • मैडम के फरमान को दिया खूंटी पर टांग ||
  • डीएस जे एस एस पी धर अपने यह कोड |
  • कोटा से बांटे टिकिट यही गुणा और जोड़ ||
  • अर्जी टिकिटअर्थी बनी धर ऐसा आधार | 
  • चमचे किसके हो कहो किस प्रति वफ़ा दार ||
  • चाहे क्षेत्र में हो नहीं किंचित भी आधार | 
  • चमचागिरी का कोड बता पाओ टिकिट तुम यार ||
  • पार्टी का कुछ भी बने, लेने जाए तेल | 
  • कोटा पेटा भर चलो राजनीती का खेल ||  
  • रचना प्रदीप मानोरिया