बेटे बेटी के लिये संजोये /
क्या ह्सीन ख्वाबों में खोये /
हर पिता वहीं को दौड रहा है /
दिशा सपनों की मोड रहा है /
शिक्षा की इस मंडी में /
कोटा की तलवंडी में /
धंधे का तूफान मचा है /
इससे नहीं यहॉं कोई बचा है /
उद्योग क्षेत्र सा विकसित है अब /
पा के दाखिला पुलकित हैं सब /
जीवन भर की बचत यहॉं पर /
करते हैं कुरबान यहॉं पर /
बच्चों के केरियर के हेतु /
शायद यही सिध्द हो सेतु /
बाप इसी सपने को सजाये /
फलीभूत हों सब आशायें /
इसी बात पर लुटता जाता /
सारी बचत तलवंडी में चढाता /
लुटे अरे दो साल तक, ना हो बच्चा पास |
बाप तो पागल सा फिरे , टूट गई सब आस ||
अपने बच्चे की योग्यता पहले करना जॉंच |
फिर कोटा में भेजना , नहीं आयेग़ी ऑंच ||
by Pradeep Manoria 09425132060