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Wednesday, 19 November 2008

शिक्षा की मंडी कोटा

बेटे बेटी के लिये संजोये / 
क्या ह्सीन ख्वाबों में खोये / 
हर पिता वहीं को दौड रहा है /
दिशा सपनों की मोड रहा है / 
शिक्षा की इस मंडी में / 
कोटा की तलवंडी में /
धंधे का तूफान मचा है / 
इससे नहीं यहॉं कोई बचा है / 
उद्योग क्षेत्र सा विकसित है अब / 
पा के दाखिला पुलकित हैं सब / 
जीवन भर की बचत यहॉं पर / 
करते हैं कुरबान यहॉं पर / 
बच्चों के केरियर के हेतु / 
शायद यही सिध्द हो सेतु / 
बाप इसी सपने को सजाये / 
फलीभूत हों सब आशायें / 
इसी बात पर लुटता जाता / 
सारी बचत तलवंडी में चढाता / 
लुटे अरे दो साल तक, ना हो बच्चा पास |
बाप तो पागल सा फिरे , टूट गई सब आस ||
अपने बच्चे की योग्यता पहले करना जॉंच |
फिर कोटा में भेजना , नहीं आयेग़ी ऑंच ||
by Pradeep Manoria 09425132060