- शुरू हुयी जबसे तथाकथित आशीर्वाद यात्रा
- अचानक बढ़ गयी शहर में नेताओं की मात्रा
- सर पर विधानसभा चुनाव लटक रहे हैं
- हर तरह के नेता टिकिट के लिए भटक रहे हैं
- योजनाओं का पुलिंदा मुख्यमंत्री जी के पास तैयार है
- बस में घूम रहे हैं क्योंकि पुलिंदा ढोने को कार तो बेकार है
- रोज हो रही हैं नई नई योजनाओं की घोषणा
- रोज हो रही हैं बच्चों की मौत कारण है कुपोषणा
- हर शहर का पेंटर व्यस्त हो गया है अनायास
- क्योंकि रोज हो रहे है अनगिनत शिलान्यास
- एक एक पेंटर मार्बल के पटिये खोद रहे हैं
- ख़ुद नहीं पाये तो मुख्यमंत्री जी ऐसे ही ठोक रहे हैं
- यह आशीर्वाद यात्रा नहीं मार्केटिंग का टूर है
- इनका ग्राहक वोटर आज भी लाचार और मजबूर है
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रचना प्रदीप मानोरिया